भारत के मुश्किल वक़्त में अमेरिका की 'इस मदद' से भारत को होगा फ़ायदा
चीन की बढ़ती ताक़त को 'संतुलित' करने खुलकर भारत के समर्थन में आया अमेरिका
JUNE 20 (WTN) - अमेरिका और चीन के बीच काफी लम्बे समय से वर्चस्व की लड़ाई जारी है। विश्व की पहली और दूसरे नम्बर की अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर से सभी वाकिफ़ हैं। वहीं, साउथ चाइना सी पर चीन की दादागिरी का विरोध करने के कारण दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष की आशंका भी बनी रहती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका इस समय चीन के वर्चस्व को कम और संतुलित करने के लिए कूटनीतिक तरीक़े से काम कर रहा है। अमेरिका जानता है कि चीन के बढ़ते वर्चस्व को सिर्फ और सिर्फ भारत ही कम कर सकता है। वहीं, अमेरिका यह भी जानता है कि दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते दबदबे को संतुलित करने के लिए भारत का सैन्य और आर्थिक रूप से ताक़तवर होना काफी ज़रूरी है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुए लम्बे लॉकडाउन, ट्रेड वॉर और अन्य कारणों से भारत की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, सीमा पर चीन के साथ विवाद के कारण भी भारत में तनाव की स्थिति है। ऐसे में चीन के सामने भारत कमजोर न पड़े इसलिए अमेरिका खुलकर अब भारत के समर्थन में आ गया है।
जी हां, चीन के साथ भारत के टकराव के बीच अमेरिका भारत का तरजीही व्यापार का दर्जा फिर से बहाल करने पर विचार कर रहा है। यदि अमेरिका ऐसा करता है, तो इससे भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले करीब 48.38 हजार करोड़ रुपये के उत्पादों को शुल्क से छूट मिल जाएगी.।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले साल 2019 में जून के महीने में भारत का तरजीही व्यापार का दर्जा खत्म कर भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क लगाना शुरू कर दिया था। जिसके बाद भारत ने भी जवाबी कार्रवाई में कई अमेरिकी उत्पादों पर भारी आयात शुल्क शुल्क लगाया था।
अमेरिका के अनुसार, "अभी दो देशों के बीच इस विषय पर बातचीत का दौर जारी है। यदि भारत की तरफ से संतुलित प्रस्ताव मिलता है, तो हम भारत का GSP (Generalized System of Preferences) का दर्जा दोबारा बहाल कर सकते हैं।" दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार सौदे पर बातचीत हो रही है, और अमेरिका को उम्मीद है कि दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमत हो सकते हैं।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से GPA का दर्जा इसलिए वापस ले लिया था क्योंकि उनके मुताबिक अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाज़ार में पर्याप्त पहुंच नहीं दी जाती है। अमेरिका की ओर से GPA का दर्जा खत्म किए जाने से अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क दोगुना कर दिया था। इसका नुकसान भारतीय उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है। हालांकि, भारत ने भी कई अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था जिसका नुकसान अमेरिकी उद्यमियों को उठाना पड़ रहा है।
अमेरिका को हिन्द महासागर में अपना वर्चस्व बनाए रखने और चीन के दक्षिण एशिया में बढ़ते वर्चस्व को कम और संतुलित करने के लिए भारत जैसे बड़े देश की काफी ज़रूरत है। यही कारण है कि कोरोना संकट के कारण उत्पन्न आर्थिक नुकसान और चीन से सीमा विवाद के कारण अमेरिका खुलकर भारत के सहयोग और समर्थन के लिए सामने आ गया है।