भारत-चीन युद्ध में किसका साथ देंगे अमेरिका और रूस?
भारत के समर्थन में खुलकर सामने आया अमेरिका; रूस ने फ़िलहाल अपनाई 'तटस्थता' की नीति
JUNE 26 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि गलवान घाटी में जारी तनाव के कारण भारत और चीन के बीच युद्ध की 'आशंका' व्यक्त की जा रही है। हालांकि, भारत और चीन दोनों देशों की तरफ से कहा जा रहा है कि हर विवाद को 'बातचीत' के ज़रिए सुलझा लिया जाएगा। लेकिन 1962 में चीन से धोखा खा चुका भारत, चीन की वामपंथी सरकार के किसी भी 'आश्वासन' पर यकीन करने के बजाए किसी भी तरह के 'धोखे' के हमले के लिए पूरी तरह से तैयार है।
अब यदि भारत और चीन के बीच युद्ध होता है, तो बड़ा सवाल है कि दुनिया का कौन सा देश भारत का साथ देगा? बात करें शीत युद्ध के समय की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और रूस की, तो हर किसी के मन में यही सवाल है कि यदि चीन के साथ भारत का युद्घ होता है, तो यह दोनों देश भारत का साथ देंगे या नहीं?
वैसे जहां तक अमेरिका की बात है, तो चीन के साथ भारत के युद्ध में अमेरिका खुलकर भारत का साथ देगा। दरअसल, पिछले काफी समय से अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव चरम पर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेड वॉर, कोरोना वायरस महामारी, दक्षिण चीन समुद्र में चीन की आधिपत्य की 'दादागिरी# और हांगकांग आन्दोलन समेत कई मुद्दों पर चीन और अमेरिका के बीच तनातनी चरम पर है।
अमेरिका नहीं चाहता है कि दक्षिण एशिया और हिन्द महासागर में चीन शक्तिशाली हो। इसलिए ही चीन की बढ़ती ताक़त को 'संतुलित' करने के लिए भारत और चीन के बीच जारी विवाद में अमेरिका खुलकर भारत के समर्थन में इस समय खड़ा है। इतना ही नहीं, भरत और चीन के बीच युद्ध की आशंका के कारण ही अमेरिका, यूरोप में मौजूद अपने सैनिकों को एशिया में शिफ्ट करने जा रहा है। वहीं, अमेरिका अपने युद्धपोतों को भी ज़रूरत पड़ने पर एशिया की तरफ मोड़ सकता है।
अब आते हैं शीत युद्ध के समय की दूसरी बड़ी शक्ति रूस की, तो भारत और चीन के बीच युद्ध की स्थिति में रूस का क्या रुख होगा यह एक बड़ा सवाल है। हालांकि, अभी तक की स्थिति में रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत और चीन के बीच जारी 'विवाद' में वह हस्तक्षेप नहीं करना चाहता है। लेकिन बड़ा सवाल है कि विवाद के बाद यदि भारत और चीन के बीच युद्ध होता है, तो इस स्थिति में रूस किसका साथ देगा?
हालांकि, भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक संबंधों के आधार पर आप सोच रहे होंगे कि यदि भारत का किसी देश के साथ सैन्य संघर्ष होता है, तो रूस खुलकर भारत का 'समर्थन' करेगा। लेकिन ऐसा सोचना ग़लत और जल्दबाज़ी होगी। साल 2017 में डोकलाम विवाद के समय रूस ने 'तटस्थता' की नीति अपनाई थी। हालांकि, 1971 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ युद्ध में रूस ने भारत का साथ दिया था। लेकिन उससे पहले चीन के ख़िलाफ़ 1962 के युद्ध में रूस ने भारत का साथ नहीं दिया था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस और चीन दोनों ही देशों की विचारधारा वामपंथी रही है। स्वाभाविक है कि विचारधारा में समानता के कारण कहा जा सकता है कि भारत और चीन के बीच युद्ध की स्थिति में रूस खुलकर चीन का साथ देगा। वहीं, रूस के राजनीति के जानकारों के अनुसार, इस समय रूस आर्थिक रूप से उतना शक्तिशाली नहीं है जितना वह पहला था। ऐसे में रूस को चीन की आर्थिक मदद की इस समय काफी ज़रूरत है। तो माना जा सकता है कि युद्ध के समय में रूस भारत का साथ न दे।
ख़ैर, जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका और चीन के बीच काफी पुरानी 'दुश्मनी' रही है। ऐसे में भारत और चीन के बीच युद्ध में यदि अमेरिका भारत का साथ देता है, तो रूस के सामने तीन विकल्प होंगे।
पहला विकल्प यह कि रूस भारत का साथ दे। लेकिन यह सम्भव नहीं है क्योंकि रूस, अमेरिका के साथ एक ही नाव में सवार नहीं होगा और रूस सीधे तौर पर चीन से 'दुश्मनी' नहीं करना चाहेगा। दूसरा विकल्प है कि रूस, चीन का खुलकर साथ दे। लेकिन यदि रूस ऐसा करता है, तो उसे सीधे अमेरिका से टकराना होगा। लेकिन अब रूस पहले वाली स्थिति में नहीं है कि वो खुलकर अमेरिका के ख़िलाफ़ आए। वहीं, कोरोना वायरस संकट के समय में रूस खुलकर चीन का साथ देकर अन्य देशों को 'नाराज़' भी नहीं करना चाहेगा। तो अब बचा तीसरा विकल्प, तो वो यह है कि भारत और चीन के बीच यदि युद्ध होता है, तो चीन पूरी तरह से तटस्थ रहे।