चालू वित्त वर्ष में देश की GDP ग्रोथ रेट 'नेगेटिव' रहने की आशंका!
कोरोना संकट में GDP में 4.5 से 5 प्रतिशत तक कमी की आशंका
JUNE 27 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी अभी तक क़रीब 4 लाख 97 हज़ार लोगों की जान ले चुकी है। लेकिन इतना होने के बाद भी चीन की वामपंथी सरकार अपनी ग़लती और ज़िम्मेदारी समझने के भारत और अन्य देशों के साथ सीमा विवाद कर रही है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को फैलने से रोकने के लिए भारत में एक लम्बा लॉकडाउन लगाया गया था। लम्बे लॉकडाउन के कारण भारत में लगभग सारी आर्थिक गतिविधियां ठप सी पड़ गई थीं। लॉकडाउन के कारण जहां एक तरफ उत्पादन ठप रहा, तो वहीं लाखों लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इतना ही नहीं, लॉकडाउन के कारण केन्द्र और राज्य सरकारों के राजस्व कलेक्शन में भी भारी गिरावट दर्ज़ की गई है।
इन्हीं सब कारणों से अनुमान लगाया जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। अंदेशा है कि चार दशक में पहली बार भारत की GDP ग्रोथ रेट निगेटिव रह सकती है। इस सबके बीच, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुताबिक़, भारत की अर्थव्यवस्था इस समय गम्भीर संकट में है, और आशंका है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP 5 प्रतिशत कम रहने वाली है।
एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में आ रही परेशानी, नीतिगत रिस्पॉन्स में कमी और इससे आई कमज़ोरी को देखते हुए इस चालू वित्त वर्ष के दौरान GDP में 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। लेकिन उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष 2021-2022 में अर्थव्यवस्था में रिकवरी हो सकती है।
इधर, IMF (International Monetary Fund) यानि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने साल 2020 में भारत की जीडीपी 4.5 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया है। IMF के अनुसार, GDP में यह गिरावट ऐतिहासिक होगी। हालांकि, IMF को उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की GDP ग्रोथ रेट में तेज़ी देखी जा सकती है।
IMF का अनुमान है कि साल 2021 में भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.0 प्रतिशत के क़रीब रह सकती है। IMF के अनुसार, COVID-19 महामारी के कारण साल 2020 की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव अनुमान से कहीं ज़्यादा पड़ा है। ऐसे में इसका असर भारत की GDP और GDP ग्रोथ रेट पर पड़ेगा।
अब जबकि पिछले वित्त वर्ष 2019-2020 में भारत की GDP ग्रोथ रेट सिर्फ़ 4.2 प्रतिशत रही थी, तो ऐसे में चालू वित्त वर्ष में नकारात्मक GDP ग्रोथ रेट मोदी सरकार के लिए चिंता का एक बड़ा कारण है। इस समय जबकि चीन सीमा पर युद्ध के हालात हैं, ऐसे में देश का काफी पैसा वहां पर सैनिकों और हथियारों की तैनाती में ख़र्च हो रहा है। कहा जा सकता है कि इसी कारण से हर रोज़ पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ रहे हैं। अब देखना होगा कि भारत की जनता इन कठिन परिस्थितियों में सरकार का कितना साथ देती है?