भारत में चीन के 59 ऐप्स बैन होने से 'इस कारण' से बौखलाई हुई है चीन की वामपंथी सरकार
चीनी ऐप्स के बैन होने से चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को लगेगा बड़ा झटका
JULY 01 ( WTN) - चीन एक ऐसा देश है जो अपने पड़ोसी देशों के साथ हमेशा से ही सीमा विवाद करता रहता है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि हाल ही में पूर्वी लद्दाख में स्थित गलवान घाटी में चीन ने LAC पर भारत के साथ एक बार फिर से सीमा विवाद किया है। इसी कारण 15 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक वीर गति को प्राप्त हुए थे। हालांकि, पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह के मुताबिक़, इस हिंसक झड़प में चीन के क़रीब 40 सैनिक मारे गए हैं।
दरअसल, चीन काफी लम्बे समय से सीमा विवाद को जन्म देता रहा है। इतना ही नहीं, चीन कूटनीति के तहत भारत के पड़ोसी देशों को भारत के ख़िलाफ़ भड़काता रहता है। लेकिन इस बार चीन की वामपंथी सरकार का भारत में मोदी सरकार से सामना है। चीन की दादागिरी को करारा मुंहतोड़ जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने भारत में प्रचलित चीन के 59 चीनी मोबाइल ऐप को बैन कर दिया है।
चीन के 59 ऐप्स बैन होने के बाद भारतीय लोगों के मन में सवाल है कि इन ऐप्स के बैन होने से चीन को क्या कुछ नुकसान हो सकता है? तो आइए आपको बताते हैं कि भारत में चीन के 59 ऐप्स बैन होने से चीन को क्या और कैसा ज़बरदस्त नुकसान होगा?
जैसा कि आप जानते ही हैं कि भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप्स को भारत की संप्रभुता, अखंडता व सुरक्षा को ख़तरे की आशंका के कारण बैन कर किया है। भारत सरकार ने आईटी एक्ट के सेक्शन 69 ए के तहत इन 59 एप पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इन ऐप्स को भारत में बैन किए जाने के बाद चीन का कहना है कि भारत सरकार का यह फैसला WTO (World Trade Organization) के नियमों का उल्लंघन है। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार यह भूल गई है कि उसने भी फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियों को अपने देश में प्रतिबंधित किया हुआ है।
भारत में चीन के 59 ऐप्स बैन होने के बाद चीन की वामपंथी सरकार की प्रतिक्रिया से साफ ज़ाहिर होता है कि मोदी सरकार की इस डिजिटल स्ट्राइक से चीन को काफी बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। दरअसल, चीन के 59 ऐप्स बैन होने से चीन की इन इंटरनेट कंपनियों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन पर यूरोप और अमेरिका में जासूसी के लिए दूरसंचार और अन्य उपकरणों के आयात का उपयोग करने का आरोप लग रहा है। ऐसे में भारत में चीन के ऐप्स बैन होने से चीन की वामपंथी सरकार को यह डर लग रहा रहा है कि दुनिया के अन्य देश भी भारत की तरह चीन के ऐप्स पर बैन न लगा दें।
दरअसल, चीन में बाहरी देश की कंपनियों को नो एंट्री है। इसलिए चीन की आईटी कंपनियां बहुत तेज़ी और आसानी से आगे बढ़ रही हैं और अरबों डॉलर की कमाई करती रही। अब इन्हीं पैसे से चीन की यह कंपनियां चीन से बाहर अन्य देशों में अपना व्यापार बढ़ा रहे हैं।
इसी कारण से अन्य देशों में चीनी कंपनियों ने या तो निवेश किया है या फिर अन्य देशों में अपनी सेवाएं शुरू की हैं। अब जबकि भारत एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार है, तो ऐसे में चीन के इन ऐप्स को भारत में काफी मोटी कमाई हो रही थी। भारत के विशाल उपभोक्ता बाज़ार से चीन के इन ऐप्स को इतनी ज़्यादा कमाई हो रही थी कि टिक टॉक जैसा ऐप भारत में एक बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की योजना बना रहा था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक अनुमान के अनुसार भारत में साल 2019 में टॉप 200 ऐप्स में 38 प्रतिशत ऐप्स चीन के थे। भारत के विशाल उपभोक्ता बाज़ार से चीन के इन ऐप्स को इतनी ज़्यादा कमाई हो रही थी कि टिक टॉक जैसा ऐप भारत में एक बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की योजना बना रहा था।
वहीं, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की लगभग सभी इंटरनेशनल कंपनियों में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों का पैसा लगा हुआ है। भारत में बैन हुए 59 ऐप्स में से कई ऐप्स में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों का पैसा लगा हुआ है। साफ है कि इन ऐप्स के भारत में बैन होने से कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को भी बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। यही कारण है कि चीन के 59 ऐप्स के भारत में बैन होने से चीन की वामपंथी सरकार बौखलाई हुई है।