चीन में लिखने, बोलने और पढ़ने पर 'इस तरह' से होती है सेंसरशिप!
जानिए कितनी 'डरपोक' है चीन की वामपंथी सरकार?
JULY 02 (WTN) - चीन की वामपंथी सरकार दुनिया की सबसे 'डरपोक' सरकारों में से एक हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि चीन की वामपंथी सरकार अपने नागरिकों की अभिव्यक्ति की आज़ादी से इतना डरती है कि चीन के नागरिकों को कुछ भी बोलने और लिखने से पहले उनकी सरकार की 'इजाज़त' लेनी पड़ती है।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में स्वतंत्र मीडिया पर कड़ी पाबंदी है। चीन में कोई भी विदेशी मीडिया 'कवरेज' नहीं कर सकती है। वहीं चीन की वामपंथी सरकार ने देश के अन्दर इंटरनेट पर सेंसरशिप लगाकर रखी हुई है जिसके कारण चीन में गूगल, फेसबुक, व्हाट्सएप्प और ट्विटर समेत कई सर्च इंजन, वेबसाइट्स और मैसेंजिंग ऐप्स प्रतिबंधित हैं। दरसअल, चीन की वामपंथी सरकार नहीं चाहती है कि चीन के नागरिक अन्य देशों के नागरिकों के सम्पर्क में आएं।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि चीन की वामपंथी सरकार अपने ख़िलाफ़ उठने वाली हर आवाज़ से इतनी डरती है कि वहां की सरकार ने इंटरनेट पर बाकायदा तगड़ी सेंसरशिप लगाकर रखी है। जी हां, और ऐसा करने के लिए चीन में द ग्रेट फायरवॉल ऑफ चाइना नाम की एक इंटरनेट सेंसरशिप है। इसे दुनिया का सबसे एडवांस्ड इंटरनेट सेंसरशिप और गोल्डेन शील्ड प्रोजेक्ट भी कहा जाता है।
चीन की वामपंथी सरकार की डरपोक सोच के कारण ही चीन इंटरनेट फ्रीडम के मामले में सबसे निचले पायदान पर है। चीन ने बाहरी देशों के सर्च इंजन, वेबसाइट्स और ऐप्स को ब्लॉक करके रखा है। हालांकि, चीन में सर्च इंजन, सोशल मीडिया और मैसेजिंग के अलग मौजूद विकल्प हैं जो चीन के नागरिक इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यहां पर सिर्फ चीनी नागरिक ही सीमित हैं।
दरअसल, चीन की 'डरपोक' वामपंथी सरकार नहीं चाहती है कि चीन के नागरिक बाहरी दुनिया के सम्पर्क में आएं। इसलिए चीन में बाहर की सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स को ब्लॉक करके चीनी नागरिकों को उनका चीनी विकल्प यूज़ करने के लिए मजबूर किया जाता है।
चीन की वामपंथी सरकार नहीं चाहती है चीनी नागरिक सरकार के ख़िलाफ़ कुछ भी लिखें या पढ़ें। इसलिए ही चीन इसी फायरवॉल की मदद से कॉन्टेंट को सेंसर करता है। इतना ही नहीं, चीन की वामपंथी सरकार कई बार सर्च इंजन रिजल्ट में भी मैनिपुलेशन करती है। ग्रेट फायरवॉल ऑफ चाइना क्रॉस बॉर्डर इंटरनेट ट्रैफिक को भी नियंत्रित करता है जिनमें दूसरे देशों की बड़ी वेबसाइट्स शामिल होती हैं।
इस फायरवॉल की मदद से बाकायदा व्यक्तिगत वेबसाइट्स भी ब्लॉक की जाती हैं। वहीं, यह फायरवॉल ब्लैकलिस्ट किए गए कीवर्ड को वेब पेज से स्कैन करके उसे ब्लॉक भी कर देता है। साथ ही इसमें आईपी ब्लॉकिंग और डीएनएस ब्लॉकिंग भी शामिल है।
अपने नागरिकों की आज़ादी को सीमित करने के लिए चीन की वामपंथी सरकार ने ग्रेट फायरवॉल ऑफ चाइना या गोल्डेन शील्ड प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 1998 में की थी। ऐसा नहीं है कि ग्रेट फायरवॉल को तोड़ा नहीं जा सकता है। ऐसा करना भी सम्भव है, लेकिन ऐसा करना थोड़ा मुश्किल होता है। वैसे फायरवॉल की पकड़ से बचने के लिए लोग कई तरह के एडवांस्ड वीपीएन सॉल्यूशन का यूज़ करते हैं।