अब आतंकियों के दम पर भारत को परेशान करने की प्लानिंग में चीन की वामपंथी सरकार!
चीन की सरकार और सेना दे रही म्यामांर में आतंकियों को मदद
JULY 03 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पूरी दुनिया में फैलकर लाखों लोगों को संक्रमित कर उनकी जान ले चुकी है। इतना ही नहीं, चीन की घमंडी वामपंथी सरकार अपने पड़ोसी देशों के साथ लगातार सीमा विवाद करते हुए उन्हें धमकाने का काम भी करती रहती है।
जहां तक भारत की बात है, तो चीन और भारत के बीच साल 1962 से ही लगातार सीमा पर विवाद की स्थिति है। सालों से चीन LAC पर दादागिरी दिखाने की कोशिश करता है। लेकिन अब जबकि भारत की मोदी सरकार ने चीन की वामपंथी सरकार को उसी की भाषा में जवाब दिया है, तो ऐसे में चीन की बौखलाहट सामने आ रही है क्योंकि लद्दाख पर चीन की आक्रामकता को भारत ने विफल कर दिया है।
इतना ही नहीं, चीन काफी लम्बे समय से कूटनीति के तहत भारत के पड़ोसी देशों को भारत के ख़िलाफ़ भड़काने के प्रयासों में लगा हुआ है। भारत विरोध की नीति के तहत पाकिस्तान तो सालों से चीन की 'गुलामी' में लगा हुआ ही है। वहीं अब चीन ने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका को भी अपने जाल में फंसाना शरू कर दिया है जिससे भारत को चारों तरफ से 'घेरा' जा सके।
वैसे तो चीन अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को मदद करता आया है। लेकिन अब चीन भारत के पड़ोसी देश म्यांमार के आतंकी समूह अराकान आर्मी की आर्थिक मदद कर रहा है। दरअसल, चीन का उद्देश्य है कि इस आतंकी ग्रुप के ज़रिए भारत और म्यांमार दोनों ही देशों में आतंकी गतिविधियों के माध्यम से आंतरिक हालात ख़राब किए जा सकें।
वैसे तो इस बात का अंदेशा काफी समय से लगाया जा रहा था कि अराकान आर्मी को चीन मदद कर रहा है। लेकिन इस आशंका को और भी बल तब मिला जब रूस के सरकारी चैनल Zvezda में एक साक्षात्कार के दौरान म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने स्पष्ट कहा कि उनके देश में जो आतंकी समूह हैं, उनके साथ 'मजबूत ताक़तें' काम कर रही हैं। जनरल मिन आंग ह्लाइंग की बातों से माना जा रहा है कि इस 'मजबूत ताक़त' का अर्थ चीन ही है। इतना ही नहीं, साक्षात्कार के दौरान म्यांमार के जनरल ने अरकान आर्मी के आतंक के खात्मे के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद तक की मांग की है।
दरअसल, म्यांमार में चीन इसलिए आतंक फैलाना चाहता है क्योंकि वो म्यामांर में अपने कई प्रोजेक्ट्स की मंजूरी चाहता है। अब जबकि चीन को इस काम में सफलता हासिल नहीं हो पा रही है इसलिए चीन अराकान आर्मी को आर्थिक सहायता से मदद कर म्यामांर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
इतना ही नहीं, चीन की कोशिश है कि भारत और म्यांमार के बीच के सालों से मजबूत राजनैतिक और व्यापारिक संबंधों को खराब किया जाए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2017 में भारत को म्यांमार में सड़क बनाने का 220 मिलियन डॉलर का इंटरनेशनल हाईवे का प्रोजेक्ट मिला था। इस महत्वाकांक्षी योजना में भारत और म्यांमार के साथ थाइलैंड भी शामिल है ताकि तीनों देशों के बीच कारोबार और पर्यटन की गतिविधियों में आसानी हो सके। वहीं, म्यांमार ने चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट- वन रोड परियोजना का हिस्सा बनने से भी इनकार कर दिया है। यही और बाक़ी अन्य कारणों से भी चीन की वामपंथी सरकार म्यामांर की सरकार से भड़की हुई है। इसी कारण से म्यामांर के आतंकी ग्रुप अराकान आर्मी को म्यामांर और भारत में अशांति फैलाने के लिए चीन आर्थिक मदद कर रहा है। बता दें कि यह आतंकी संगठन म्यांमार के चीन से सटे हुए हिस्से राखिन स्टेट में काम कर रहा है। अप्रैल 2009 में गठित यह ग्रुप म्यामांर का सबसे बड़ा सशस्त्र आतंकी समूह माना जाता है।
आतंकी संगठन अराकान आर्मी रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों की रक्षा के नाम पर सशस्त्र संघर्ष कर रही है और इसके ज़्यादातर सदस्य बांग्लादेश से आए अवैध शरणार्थी हैं। यह संगठन म्यामांर की सेना, पुलिस और आम लोगों पर हमला करता रहता है। इस आतंकी संगठन को चीन में हथियार चलाने समेत प्लानिंग की ट्रेनिंग मिलती है। यह आतंकी संगठन साल 2019 से ही चीन में बने हथियारों से लगातार म्यांमार आर्मी पर हमले कर रहा है।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और PLA (People's Liberation Army) के अराकान आर्मी से काफी गहरे संबंधों के बारे में अब लगभग सभी जानते हैं। चीन से लगातार अराकान आर्मी को हथियार, हथियार चलाने की ट्रेनिंग और आर्थिक सहायता मिलती रहती है।
म्यांमार में आतंक फैलाने के लिए अराकान आर्मी समेत कई अन्य समूहों को चीन आर्थिक और हथियारों की मदद कर रहा है। दरअसल, चीन चाहता है कि म्यांमार अपने ही देश में आतंकियों के साथ लड़ाई में फंसा रहे और दूसरे देशों से खासकर भारत और विकसित पश्चिमी देशों के साथ उसके कूटनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत न हो सकें।