अब समुद्री द्वीपों पर 'कब्ज़ा' जमाने की चीन की 'नापाक' कोशिश!
विकासवाद के युग में चीन की विस्तारवादी नीति से दुनिया हुई 'परेशान'
JULY 06 (WTN) - विकासवाद के इस युग में भी चीन की वामपंथी सरकार विस्तारवाद की एक सदी पुरानी विचारधारा पर काम कर रही है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन अपने सभी सीमावर्ती देशों के सीमा विवाद करता रहता है। हाल ही में पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में LAC (Line of Actual Control) पर चीन की सेना PLA (People's Liberation Army) ने बिना वजह सीमा विवाद को जन्म दिया। जिसके बाद भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी।
भारत ही नहीं, बल्कि चीन की वामपंथी सरकार रूस के साथ भी सीमा विवाद की तैयारी कर रही है। हाल ही में चीन की एक वेबसाइट ने, जो कि चीन की वामपंथी सरकार द्वारा नियंत्रित है, उसने रूस के बड़े शहर व्लाडिवोस्तक पर अपना अधिकार जताया है। इतना ही नहीं, चीन अब हॉन्ग कॉन्ग के साथ किए गए अपने वादों से भी मुकर रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की वामपंथी सरकार अपनी विस्तारवादी नीति को अमल में लाने के लिए सीमावर्ती देशों के साथ तो सीमा विवाद कर ही रही है, साथ ही चीन की नापाक नज़र दक्षिण चीन सागर के क़रीब 250 द्वीपों पर भी है। एक जानकारी के अनुसार, चीन इन सभी द्वीपों पर कब्जा करना चाहता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया का क़रीब एक तिहाई व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है। दरअसल, जानकारों के अनुसार, चीन की योजना है कि इन द्वीपों पर कब्जा कर यहां से निकलने वाले हर जहाज पर नज़र रखी जा सके, और यहां पर अपना दबदबा कायम रखा जा सके।
दक्षिणी चीन सागर में चीन की बढ़ती घुसपैठ और दादागिरी से अमेरिका समेत कई देश चिंतित और सचेत हैं। साफ है कि यदि चीन की विस्तारवाद की मानसिकता पर अभी अंकुश नहीं लगाया गया, तो चीन योजनाबद्ध तरीक़े से इन सभी द्वीपों पर कब्जा कर सकता है
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दक्षिणी चीन सागर में चीन की नौसेना युद्धाभ्यास कर रही है। चीन के नौसेना के दक्षिणी, उत्तरी और पूर्वी थिएटर कमांड्स ने दक्षिणी चीन सागर, पीला सागर और पूर्वी चीन सागर में अपना नौसैनिक कौशल दिखाकर एक तरह से समुद्रीय पड़ोसी देशों को डराने और धमकाने की कोशिश की है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, "ज़मीन पर विस्तारवाद की नीति को अपनाने और बहुत कुछ सफल होने के बाद चीन की वामपंथी सरकार अब समुद्र में भी विस्तारवाद की नीति को आज़माने की नीति पर काम कर रही है।" दरअसल, दक्षिण चीन सागर पर चीन काफी लम्बे समय से अपना दावा करता आया है। हालांकि, इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चीन को हार का सामना करना पड़ा है। जापान, वियतनाम और अन्य कई देश दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी और ग़ैर ज़रूरी मौजूदगी का विरोध करते रहे हैं।
जैसा कि हमने आपको बताया कि दक्षिणी चीन सागर विश्व व्यापार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इसी कारण से जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों को आशंका हैं कि दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर यदि चीन ने कब्जा कर लिया, तो इस इलाके से होने वाले व्यापार को चीन की नौसेना नज़र रखेगी, और ऐसा होने कई देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित और बाधित हो सकता है।
दक्षिणी चीन सागर में चीन की नापाक हरक़तों के बारे में अमेरिका को काफी पहले से ही अंदेशा है। इसी कारण से अमेरिका ने मिसाइलों से लैस अपने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर, इंडो पैसिफिक सागर में भेजे हैं। अमेरिका के यह एयरक्राफ्ट कैरियर जापान, वियतनाम और दक्षिण कोरिया के अपने ठिकानों के पास अभ्यास करेंगे।
दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से चीन घबराया हुआ है और ख़ुद को घिरा हुआ महूसस कर रहा है। इसी कारण से चीन की वामपंथी सरकार के मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका को भी धमकी दी है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, "दक्षिण चीन सागर में तैनात अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर पर चीनी सेना की नज़र है और यह चीन की सेना के रेंज में हैं। ज़रूरत पड़ने पर चीन की सेना की विध्वंसक मिसाइलें डोंगफेंग-21 और डोंगफेंग-25 अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को तबाह कर सकती हैं।"
अमेरिका के यह एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिकी नौसैनिक ताकत के प्रतीक माने जाते हैं। दक्षिण चीन सागर में अपनी मौजूदगी पर अमेरिका का कहना है कि अमेरिका के युद्धाभ्यास का उद्देश्य इस इलाके के हर देश को उड़ान भरने, समुद्री इलाके से गुजरने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक संचालन करने में सहायता देना है।
दरअसल, अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में यह युद्धाभ्यास ऐसे समय पर शुरू किया है, जब इसी इलाके में चीन की नौसेना भी युद्धाभ्यास कर रही है। बता दें कि चीन की नेवी परासेल द्वीप समूह के पास पिछले कई समय से युद्धाभ्यास करके ताइवान और अन्य पड़ोसी देशों को धमकाने में जुटी हुई है। साफ है कि चीन की नापाक नज़र दक्षिण चीन सागर के 250 द्वीपों पर है, लेकिन अमेरिका की मजबूत मौजूदगी से चीन अपने मंसूबों में फिलहाल कामयाब नहीं हो पा रहा है।