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हॉन्ग कॉन्ग में 'मानवाधिकार दमन' की नई इबारत लिखती चीन की वामपंथी सरकार!

Tuesday - July 7, 2020 1:01 pm , Category : WTN HINDI
हॉन्ग कॉन्ग में जारी है चीन की सेना की 'बर्बरता'
हॉन्ग कॉन्ग में जारी है चीन की सेना की 'बर्बरता'

अब हॉन्ग कॉन्ग के नागरिकों की 'आवाज़' दबा रही चीन की वामपंथी सरकार

JULY 07 (WTN) - कहा जाता है कि सामर्थ्यवान होने पर अपने आप ज़िम्मेदारी का एहसास हो जाता है। लेकिन 'विस्तारवादी मानसिकता' वाले चीन की वामपंथी सरकार का इससे कोई वास्ता नहीं है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बाद भी चीन की वामपंथी सरकार न तो 'वादों' को निभाती है और न ही मानवाधिकार में 'विश्वास' रखती है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन ने तिब्बत पर 'कब्ज़ा' किया हुआ है, और तिब्बती लोगों को अपना देश छोड़कर भारत और अन्य देशों में शरण लेनी पड़ी है। अभी भी तिब्बत में चीन की सेना का 'अत्याचार' लगातार जारी है। इतना ही नहीं, चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ जो 'अमानवीय व्यवहार' किया जा रहा है वो किसी से छिपा नहीं है। उइगर मुस्लिमों के संदर्भ में कहा जा सकता है चीन की वामपंथी सरकार सुनियोजित तरीके से उइगर मुस्लिमों का 'नरसंहार' कर रही है।

चीन की वामपंथी सरकार की 'अमानवीय' हरकतें अब हॉन्ग कॉन्ग में भी बढ़ती जा रही हैं। दरअसल, अब चीन की वामपंथी सरकार हॉन्ग कॉन्ग में भी अपनी 'दमनकारी नीतियां' लागू करने जा रही है, जिसके तहत अब हॉन्ग कॉन्ग में वे सभी 'पाबंदियां' और 'सेंसरशिप' लागू होंगी, जो कि चीन में लागू हैं। लेकिन हॉन्ग कॉन्ग में नए नियम लागू करके चीन, ब्रिटेन और हॉन्ग कॉन्ग को किए अपने वादों से पीछे हट रहा है।

हॉन्ग कॉन्ग में सुरक्षा कानून लागू होने के बाद ब्रिटेन ने हॉन्ग कॉन्ग के क़रीब 30 लाख लोगों को अपने यहां नागरिकता देने की बात की। ब्रिटेन का आरोप है कि चीन ने हॉन्ग कॉन्ग के बारे में ब्रिटेन के साथ किए गए समझौते को तोड़ा है और हॉन्ग कॉन्ग के नागरिकों को 'परेशान' किया है। हालांकि, इस बारे में चीन का कहना है कि हॉन्ग कॉन्ग के लोग चीनी नागरिक हैं और वो (चीन) उन्हें किसी दूसरे किसी देश की नागरिकता नहीं लेने देगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन, ब्रिटेन के सामने एक 'हारा' हुआ देश है। 1839 से 1842 के बीच ब्रिटेन की ईस्ट इण्डिया कंपनी के साथ हुए अफीम युद्ध में हज़ारों चीनी सैनिक मारे गए थे। युद्ध के बाद साल 1842 में ब्रिटेन और चीन के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत, चीन को अपने बंदरगाह ब्रिटिश व्यापारियों के लिए खोलने पड़े थे और ब्रिटेन को हॉन्ग कॉन्ग पर 'कब्ज़ा' मिला। जिसके बाद सालों तक हॉन्ग कॉन्ग पर ब्रिटेन का 'अधिकार' रहा।

बाद में साल 1984 में ब्रिटेन और चीन के बीच हुए नए समझौते के अनुसार, ब्रिटेन अपने उपनिवेश हॉन्ग कॉन्ग को चीन को वापस सौंप देगा। 155 साल बाद साल 1997 में हॉन्ग कॉन्ग वापस चीन के पास आ गया। हालांकि, चीन ने ब्रिटेन के साथ समझौते में हॉन्ग कॉन्ग की 'स्वायत्ता' की शर्त को 'स्वीकार' किया था। इसमें हॉन्ग कॉन्ग को विशेष प्रशासनिक क्षेत्र घोषित किया गया था। चीन ने हॉन्ग कॉन्ग को वापस लेते समय ब्रिटेन के साथ 'वादा' किया था कि हॉन्ग कॉन्ग के नागरिकों को जिस तरह के अधिकार मिले थे वे आगे भी जारी रहेंगे।

लेकिन किए गए वादों को तोड़ना और 'धोखा' देना ही चीन की वामपंथी सरकार की सबसे बड़ी 'विशेषता' है। इसी का अनुसरण करते हुए हॉन्ग कॉन्ग के साथ किए लगभग सभी वादों से चीन की वामपंथी सरकार 'मुकर' गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉन्ग कॉन्ग के लिए नया राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून पारित हो चुका है। इस नए राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत, चीन अब हॉन्ग कॉन्ग में 'सीधे' दखल दे सकता है।

नए क़ानून के तहत, अब हॉन्ग कॉन्ग में नया नेशनल सेक्युरिटी ऑफिस बनेगा, जो वहां के 'हालात' पर नज़र रखेगा और खुफिया जानकारी इकट्ठा करेगा। वहीं, अगर इस ऑफिस ने किसी के ख़िलाफ़ कोई भी मामला दर्ज़ किया, तो इसकी सुनवाई चीन में भी हो सकती है। यानि कि साफ है कि चीन सरकार के इस नए क़ानून के बाद से हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता ख़त्म हो गई है।

नए क़ानून के अनुसार, चीन का यह नेशनल सेक्युरिटी ऑफिस एक तरह से 'सुपर वॉच-डॉग' की तरह काम करेगा। वहीं, हॉन्ग कॉन्ग को उसके साथ तालमेल बैठाने के लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग बनाना होगा। साथ ही इस ऑफिस की बात भी इस आयोग को मानना पड़ेगी। इतना ही नहीं, यदि हॉन्ग कॉन्ग में कोई सुरक्षा क़ानून से खिलवाड़ करने का दोषी पाया जाएगा, तो उसे आजीवन कारावास की सज़ा भी हो सकती है।

साफ है कि चीन की वामपंथी सरकार अभी तक अपने नागरिकों के साथ जो ज़्यादतियां करती आई है, वहीं ज़्यादतियां अब हॉन्ग कॉन्ग के नागरिकों के साथ भी चीन की वामपंथी सरकार करेगी। यानि कि अब हॉन्ग कॉन्ग में भी चीन की वामपंथी सरकार सेंसरशिप लागू करने जा रही है। ख़ैर, जब 1989 में चीन की वामपंथी सरकार लोकतंत्र की मांग कर रही अपनी जनता पर सेना के टैंकों से हमला कर सकती है, तो चीन की वामपंथी सरकार हॉन्ग कॉन्ग के लोगों की 'आवाज़ दबाने' के लिए कुछ भी कर सकती है।