कोरोना वायरस पर जल्द ही सामने आएगा चीन की वामपंथी सरकार का 'झूठ'
... तो 'इस कारण' से वुहान की विवादित लैब पर फिर गहराया शक
JULY 07 (WTN) - अमेरिका, ब्राज़ील और भारत जैसे देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इस लेख को लिखे जाने, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से अभी तक क़रीब 5 लाख, 41 हज़ार 154 लोगों की मौत हो चुकी हैं। वहीं, इस महामारी से अभी तक 1 करोड़, 17 लाख, 61 हज़ार, 415 लोग संक्रमित हो चुके हैं।
दरअसल, चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण ही कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) चीन के वुहान शहर से पूरी दुनिया में फैल गई। अमेरिका समेत दुनिया के कई देश कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के लिए चीन की वामपंथी सरकार को 'ज़िम्मेदार' ठहरा चुके हैं। लेकिन चीन की वामपंथी सरकार इस मामले में अपनी कोई भी 'ग़लती' और 'ज़िम्मेदारी' मानने को तैयार नहीं है।
आरोप तो यह भी हैं कि चीन की वामपंथी सरकार ने WHO (World Health Organization) के साथ 'मिलीभगत' कर COVID-19 से जुड़ी अपनी 'ग़लती' और 'असफलता' को छिपाने की कोशिश की है। लेकिन अब धीरे-धीरे COVID-19 मामले में चीन के 'ग़ैर ज़िम्मेदाराना' रवैये की पोल खुलती जा रही है। दरअसल, एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन में सात साल पहले एक ऐसे वायरस स्ट्रेन का पता चला था, जिसे मौजूदा कोरोना वायरस का सबसे क़रीबी समझा जाता है, लेकिन चीन ने इस पूरी जानकारी को 'छिपाकर' रखा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि UK की एक न्यूज़ वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, "चीन ने साल 2013 में मिले कोरोना वायरस के क़रीबी वायरस स्ट्रेन की जानकारी छिपाकर रखी थी।" जानकारी के मुताबिक, चमगादड़ और चूहे की मौजूदगी वाली एक खदान से साल 2013 में चीन को कोरोना वायरस से जुड़ा वायरस स्ट्रेन मिला था। लेकिन बजाय इस वायरस की जानकारी सार्वजनिक करने के, चीन ने इस वायरस स्ट्रेन को सालों तक वुहान की विवादित लैब में रखा।
दरअसल, साल 2013 में चीन की एक खदान में काम कर रहे 6 लोग बुखार, कफ और न्यूमोनिया से पीड़ित हो गए थे। इनमें से तीन की हालत गम्भीर हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, "बीमार पड़ने वाले इन लोगों में से 4 के शरीर में कोरोना वायरस एंटीबॉडीज़ मिले थे। लेकिन इससे पहले कि इस मामले की जांच हो, जांच से पहले ही दो लोगों की मौत हो गई थी।"
इतना ही नहीं, चीन में बैट वुमन कही जाने वालीं डॉ शी झेंगली ने फरवरी में COVID-19 पर एक अकेडमिक पेपर तैयार किया था। Nature जर्नल में प्रकाशित इस पेपर के अनुसार, "वुहान स्थित लैब में चीन ने चमगादड़ों से मिला RaTG13 वायरस रखा था, जो कि कोरोना वायरस से 96.2 प्रतिशत मिलता है।" लेकिन डॉ शी झेंगली के एक सहयोगी के मुताबिक़, "RaTG13 वही सैंपल है जो कि साल 2013 में खदान में मिला था और इससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।"
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि कुछ 'सबूत' देखने के बाद उन्हें काफी ज़्यादा 'भरोसा' हुआ है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी लैब से ही आया है। हालांकि, चीन की वामपंथी सरकार इस तरह के आरोपों को खारिज करती आई है।
कोरोना वायरस के बारे में चीन के अलग-अलग दावे रही हैं। कभी चीन कहता है कि कोरोना वायरस वुहान शहर के एक सी-फूड मार्केट से फैला है। तो कभी चीन कहता है कि कोरोना वायरस अमेरिका के सैनिकों ने वुहान में हुए वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स के दौरान सुनियोजित तरीके से फैलाया है। इसी कारण से चीन की वामपंथी सरकार कहती आई है कि वुहान स्थित लैब से वायरस लीक होने की थ्योरी पूरी तरह से ग़लत है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ ही दिन पहले WHO ने घोषणा की थी कि उसकी टीम चीन में वायरस की उत्पत्ति का पता लगाएगी। ऐसे में सात साल पहले मिले वायरस स्ट्रेन की जानकारी से COVID-19 की उत्पत्ति के संबंध में WHO को काफी महत्वपूर्ण जानकारी मिल मिल सकती है। यदि WHO की जांच में यह साबित होता है कि कोरोना वायरस, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी लैब से ही लीक हुआ है, तो चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस के कारण हुई लाखों लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराई जाएगी।