स्टडी का दावा: कोरोना वायरस से एक बार संक्रमित होने पर 'दोबारा' संक्रमण का ख़तरा
कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज के शरीर से एंटीबॉडीज़ कुछ ही हफ्ते में हो सकती है ग़ायब!
JULY 08 (WTN) - चीन की वामपंथी सरकार के ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण इस समय मानव प्रजाति अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए कोरोना वायरस संक्रमण महामारी (COVID-19) का सामना कर रही है। चीन के वुहान शहर से फैली इस बीमारी से इस लेख को लिखे जाने तक क़रीब 5 लाख, 46 हज़ार, 737 लोगों की मौत हो चुकी है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, दुनियाभर के वैज्ञानिक COVID-19 की दवा और वैक्सीन की खोज में दिन-रात लगे हुए हैं। लेकिन ठोस सफलता कब हासिल होगी? इसके बारे में अभी भी कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस सबके बीच, कोरोना वायरस और उससे प्रभावित लोगों पर कई तरह के रिसर्च जारी है, जिससे कई तरह की नई बातें सामने आ रही हैं।
ख़ैर, यदि आप यह सोच रहे हैं कि कोई व्यक्ति यदि कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो वह दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं होगा। यानि आप सोच रहे हैं कि एक बार कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर संक्रमित व्यक्ति के शरीर में एन्टीबॉडी बन जाएगी और संबंधित व्यक्ति के शरीर में इतनी इम्यून हो जाएगी कि वह दोबारा संक्रमित नहीं होगा, तो आपका सोचना ग़लत है।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्पेन में की गई एक स्टडी से कोरोना वायरस के बारे में एक डराने वाली बात सामने आई है। दरअसल, स्पेन में की गई एक स्टडी के मुताबिक, "कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित मरीजों के शरीर में बनी एंटीबॉडीज़ कुछ ही हफ्ते में गायब हो सकती है। ऐसा उन लोगों के बीच हो सकता है, जिनमें कोरोना संक्रमण से संक्रमित होने के बाद सिर्फ़ मामूली लक्षण ही देखने को मिले थे।"
इस स्टडी में दावा किया गया है कि जो लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे लेकिन हल्के तौर से ही बीमार पड़े, उनमें इम्युनिटी तो डेवलप होती है, लेकिन कुछ हफ्ते में यह इम्युनिटी ग़ायब हो जाती है।
UK की एक न्यूज़ वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, "स्पेन में क़रीब 70 हज़ार से अधिक लोगों पर स्टडी की गई थी। स्टडी के दौरान 14 प्रतिशत ऐसे लोग मिले जो पहले कोरोना एंटीबॉडीज़ की जांच में पॉजिटिव पाए गए थे। लेकिन दो महीने बाद जब दोबारा जांच की गई, तो उनमें एंटीबॉडीज़ नहीं मिले और ऐसा उन लोगों में पाया गया जिनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण पाए गए थे।
स्टडी का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर्स में शामिल स्पेन के कार्लोस-3 हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर रकील योती का इस बारे में कहना है, "इम्युनिटी अधूरी हो सकती है, या फिर इम्युनिटी अस्थाई भी हो सकती है। यानि कि इम्युनिटी कम समय के लिए भी हो सकती है और शरीर से ग़ायब भी हो सकती है।"
रिसर्च में दावा किया गया है कि पहले भी ऐसे साक्ष्य मिले हैं कि बिना लक्षण वाले कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में पर्याप्त एंटीबॉडीज़ शायद नहीं बन पाती है। वहीं, इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ रिडिंग में वायरोलॉजी के प्रोफेसर इआन जोन्स का कहना है कि जो लोग एंटीबॉडीज़ टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाते हैं, उन लोगों को यह नहीं मानना चाहिए कि वे अब सुरक्षित हो गए हैं, लेकिन हो सकता है वे सुरक्षित हों, इसलिए इस बारे में कुछ भी ठोस दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है।
वैसे स्टडी में यह बात भी सामने आई है कि कोरोना वायरस संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित स्पेन के 5.2 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडीज़ डेवलप हुई है। लेकिन इस आंकड़े के आधार पर यह भी कहा जा रहा है कि प्राकृतिक तरीके से कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ हर्ड इम्युनिटी हासिल करना सम्भव नहीं होगा।
वहीं, जिनेवा के सेंटर फॉर इमरजिंग वायरल डिजीज की प्रमुख इजाबेल एकरले और जिनेवा यूनिवर्सिटी के वायरोलॉजिस्ट बेंजामिन मेयर का स्टडी के नतीजों पर कहना है, "स्टडी के परिणामों के आधार पर कहा जा सकता है कि प्राकृतिक रूप से हर्ड इम्युनिटी हासिल करना काफी मुश्किल और लगभग असंभव होगा।"
साफ है कि जब तक कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की प्रामाणिक वैक्सीन नहीं बन जाती है, तब तक आपको खुद को सुरक्षित रखना चाहिए। क्योंकि यदि कोई कोरोना वायरस से संक्रमित होता है, और यदि उसके शरीर में एंटीबॉडीज़ नहीं बनती हैं, तो उसके फिर से कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका रहेगी। इसलिए, आयुर्वेद, योग और प्राणायाम के सहारे अपनी इम्यून पावर बढ़ाने की कोशिश करें।