...तो चीन में नहीं बल्कि यूरोप के कुछ देशों में हुई है कोरोना वायरस की 'उत्पत्ति'!
रिपोर्ट का दावा: यूरोप के कई देशों के सीवेज में काफी पहले पाया गया था कोरोना वायरस!
JULY 09 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी (COVID-19) इस समय मानव सभ्यता के सामने 'सबसे बड़ी चुनौती' है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 5,52,394 लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 1,21,80,832 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। ख़ैर, आप यह भी जानते हैं कि कोरोना वायरस से संक्रमित होकर बीमार होने का पहला केस चीन के वुहान शहर में दर्ज़ किया गया था।
तब से लेकर अभी तक, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को लेकर पूरी दुनिया चीन को 'कठघरे' में खड़ा कर रही है, और पूरी दुनिया में संक्रमण फैलने के कारण चीन की वामपंथी सरकार को दोषी माना जा रहा है। इतना ही नहीं, अमेरिका समेत दुनिया के कई देश COVID-19 के मामले में WHO (World Health Organization) की भूमिका को भी संदिग्ध मान रहे हैं। आरोप है कि WHO के डायरेक्टर जनरल अपनी वामपंथी विचारधारा के कारण कोरोना वायरस पर चीन की वामपंथी सरकार की 'ग़लती' और 'लापरवाही' को छुपाते और बचाते रहे।
इस सबके बीच, अब जबकि WHO की टीम चीन में कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जगह खोजने जाने वाली है, चीन के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने दावा किया है कि कोरोना वायरस चीन से पहले यूरोप में मिला था! चीन की वामपंथी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीन के वरिष्ठ वैज्ञानिक और श्वास संबंधी बीमारियों के एक्सपर्ट डॉ झॉन्ग नैनशैन के मुताबिक, "चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस फैलने से काफी पहले इसके अंश कुछ यूरोपीय देशों के सीवेज में मिले थे।"
दरअसल, डॉ झॉन्ग का कहना है कि इटली के मिलान और तूरीन और फ्रांस के पेरिस समेत कई यूरोपीय देशों के शहरों की सीवेज में कोरोना वायरस मिला था। इसका मतलब यह है कि वहां पर कोरोना वायरस पहले से ही मौजूद था और यह वायरस कई सालों से यूरोपीय देशों में है। हालांकि, यह बात अलग है कि कोरोना वायरस का सबसे गंभीर हमला सबसे पहले चीन के वुहान शहर में हुआ।" डॉ झॉन्ग का कहना है कि इस बात के बेहद पुख्ता सबूत मिले हैं कि कई यूरोपीय देशों में कोरोना वायरस पहले से मौजूद था, लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया था।
वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर 'लापरवाही' बरतने के आरोप लगने के बीच, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति का अध्ययन वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों द्वारा किया जाना चाहिए और इसमें सभी देशों को सहयोग करना चाहिए। लिजियान का कहना है कि हो सकता है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जगह कोई और हो, लेकिन कोरोना वायरस का संक्रमण चीन से फैला।
अब जबकि WHO की टीम कोरोना वायरस की उत्पत्ति की खोज करने चीन जाने वाली है, ऐसे में चीन की वामपंथी सरकार का कहना है कि चीन के बाद WHO की टीम को कई अन्य देशों में जाकर भी कोरोना वायरस की उत्पत्ति की तलाश करना चाहिए क्योंकि दिसंबर 2019 में इटली के मिलान और तूरीन शहर के सीवरेज में कोरोना वायरस की मौजूदगी की जानकारी मिली थी।
वहीं, स्पेन के शोधकर्ताओं को मार्च 2019 में बार्सिलोना के वेस्ट वाटर, गटर और सीवरेज में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता चल गया था। इतना ही नहीं, न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, "शोधकर्ताओं को फ्रांस, नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया के सीवरेज के सैंपल में भी कोरोना वायरस मिला था।" लेकिन उस समय दुनिया के किसी भी कोने में कोरोना वायरस का एक भी केस नहीं था। कोरोना वायरस का पहला केस 31 दिसंबर 2019 को चीन के वुहान शहर में रिपोर्ट किया गया। वहीं, यूरोपीय देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण जनवरी 2020 के आखिरी में फैला।
अब जबकि WHO की टीम कोरोना वायरस की उत्पत्ति की खोज के लिए चीन जाने वाली है, ऐसे में देखना होगा कि चीन की वामपंथी सरकार, WHO की टीम को कितना सहयोग करती है? वहीं, यदि जांच में पता चला कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन में नहीं कहीं और हुई है, तो ऐसा होने पर पूरी दुनिया की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन आ सकता है क्योंकि अमेरिका समेत कई देश काफी समय से आरोप लगा रहे हैं कि दरअसल, कोरोना वायरस चीन का एक जैविक हथियार है, और यह वायरस वुहान की एक लैब से लीक हुआ है। ख़ैर, अब देखते हैं कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर WHO की जांच कब तक पूरी होती है और जांच में क्या कुछ निकलकर सामने आता है