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कोरोना वायरस पर हो रहे शोधों से हो रहे हैं 'चौकाने' वाले ख़ुलासे!

Saturday - July 11, 2020 12:16 pm , Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस पर जारी हैं रिसर्च
कोरोना वायरस पर जारी हैं रिसर्च

मानव शरीर के अंगों पर कई तरह से 'असर' डाल रहा है कोरोना वायरस

JULY 11 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका, ब्राज़ील और भारत समेत कई देशों में कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) के मामले दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। इधर, चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी अभी तक क़रीब 5,62,889 लोगों की जान ले चुकी है। वहीं, इस बीमारी से अभी तक क़रीब 1,26,31,067 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी दवा या वैक्सीन अभी तक नहीं बन पाई है। ऐसे में इस बीमारी से बचने के लिए हम सबको सावधानी बरतना काफी ज़रूरी है। लेकिन इस सबके बीच, COVID-19 पर तरह-तरह के शोध जारी हैं। दरअसल, इन शोधों से ही COVID-19 के बारे में विस्तार से जानकारी मिल पा रही है कि यह बीमारी किस तरह से मरीज़ों पर असर कर रही है।

इधर तमाम शोधों के बीच, एक नए शोध से पता चला है कि एसिडिटी से छुटकारा पाने के लिए ली जा रही दवाएं लेने से कोरोना वायरस संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामान्यतः किडनी की बीमारी और डिमेंशिया की बीमारी के साथ-साथ और भी कई बीमारियों में हार्ट बर्न से बचाव के लिए मरीज़ों को एसिडिटी की दवाएं दी जाती हैं, और यह दवाएं काफ़ी लम्बे समय तक चलती रहती हैं। बता दें कि एसिडिटी रोकने वाली यह दवाएं पेट में ज़्यादा एसिड बनने से रोकती हैं।

अमेरिकन जर्नल ऑफ गेस्ट्रोएंटेरोलॉजी में छपे एक शोध के अनुसार, शोधकर्ताओं ने 53,000 लोगों पर एक सर्वे किया और इनमें से 4,000 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित निकले। बता दें कि ये सभी लोग काफी लम्बे समय से एसिडिटी की दवा ले रहे थे। शोध का दावा है कि अगर कोई एसिडिटी की एक गोली रोज़ ले रहा हो, तो उसे कोरोना वायरस से संक्रमण का दोगुना ख़तरा होता है। वहीं, जो मरीज़ एसिडिटी की रोज़ दो गोलियां ले रहा है, तो उस व्यक्ति को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का तीन गुना ख़तरा रहता है। 

इधर, यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबरा में किए गए एक शोध में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस बीमारी के गंभीर मरीज़ में अंगों में भीतरी सूजन या ऑर्गन डैमेज का अर्थ यह नहीं है कि वायरस का सबसे ज़्यादा असर उसी अंग पर है। दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौत के बाद जब 11 मरीजों को ऑटोप्सी की गई, तो इस सभी 11 मरीज़ों की ऑटोप्सी में पाया गया कि आंतों, लिवर और किडनी में वायरल लोड सबसे ज़्यादा था, लेकिन न तो इन अंगों में सूजन थी और न ही यह अंग बुरी तरह से डैमेज हुए थे।

शोधकर्ताओं का इस बारे में कहना है कि शरीर के कई अंगों के टिश्यू दूसरे अंगों की तुलना में वायरस से काफी बेहतर तरीक़े से लड़ पाते हैं। यह कारण है कि कहीं-कहीं वायरल लोड ज़्यादा होने पर भी यह अंग सूजन और डैमेज होने से बचे रहते हैं। लेकिन वहीं, वे अंग जिनके टिश्यू, वायरस से अच्छे तरीक़े से नहीं लड़ पाते हैं वहां पर वायरस लोड कम होने के बाद भी वे डैमेज हो जाते हैं।

इधर, न्यूयॉर्क में हुए एक शोध के मुताबिक़, ओबेसिटी यानि मोटापे से परेशान मरीज़ पर कोरोना वायरस का हमला हो, तो ऐसे मरीज़ों के श्वसन तंत्र पर बहुत असर होता है। साइंस जर्नल एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में छपे एक शोध के अनुसार, न्यूयॉर्क में कोरोना वायरस से संक्रमित 1,687 मरीज़ों पर अध्ययन किया गया, तो इससे पता चला कि कोरोना वायरस से संक्रमित जो मरीज़ वेंटिलेटर पर पहुंच गए थे, इनमें से हर तीन में से एक मरीज़ मोटापे का शिकार था। वैसे इस शोध के अनुसार, मोटापे के कारण कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु का ख़तरा तो नहीं बढ़ता है, लेकिन इससे श्वसन तंत्र पर बुरी तरह से असर होता है।