जानिए कौन हैं वो लोग जो अनजाने में सैकड़ों लोगों को कोरोना वायरस से कर रहे हैं संक्रमित?
रिसर्च: कोरोना वायरस के 80 प्रतिशत मामलों के लिए सिर्फ़ 10 प्रतिशत मरीज़ ही ज़िम्मेदार!
JULY 15 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण महामारी अब भयावह रूप धारण कर चुकी है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले काफी तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस लेख को लिखे जाने, अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से पूरी दुनिया में 5,81,392 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना वायरस के कारण अभी तक 1,34,64,486 लोग इस महामारी से संक्रमित हो चुके हैं।
चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) की अभी तक कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, COVID-19 की दवा और वैक्सीन की खोज में वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई भी ठोस परिणाम सामने नहीं आ पाया है।
वैसे इस सबके बीच, इस बात पर लगातार रिसर्च जारी है कि कोरोना वायरस संक्रमण किस तरह से फैलता है? लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कोरोना वायरस से संक्रमित हर मरीज़ कोरोना वायरस संक्रमण तेज़ी से नहीं फैलाता है। जी हां, कोरोना वायरस से संक्रमित कुछ ही लोग होते हैं जिनके कारण बहुत से लोग संक्रमित हो जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन लोगों में वायरस लोड बहुत ज़्यादा होता है और इन्हें 'सुपर स्प्रेडर' कहा जाना है।
दरअसल, कोरोना वायरस से संक्रमित सुपर स्प्रेडर में वायरस लोड इतना ज़्यादा होता है कि यह लोग एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन्हीं सुपर स्प्रेडर के कारण कई देशों में कोरोना वायरस तेज़ी से फैला।
पूरी दुनिया में जिस तेज़ी से कोरोना वायरस संक्रमण फैल रहा है उसके लिए अनजाने में ही यही सुपर स्प्रेडर ज़िम्मेदार हैं। दरअसल, आपको जानकर आश्यर्च होगा कि कोरोना वायरस से संक्रमित एक सामान्य मरीज़ एक से तीन लोगों को संक्रमित कर सकता है। लेकिन कोरोना वायरस से संक्रमित सुपर स्प्रेडर सैकड़ों लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित कर सकते हैं।
इधर, रिसर्च के आधार पर लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के इपिडेमियोलॉजिस्ट एडम कुर्चेस्की का इस बारे में कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित 10 प्रतिशत मरीज़ों से ही 80 प्रतिशत संक्रमण फैलता है। और बाक़ी मरीज़ों से संक्रमण फैलने का ख़तरा काफी कम रहता है।
हालांकि, वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या कारण है कि कोरोना वायरस से संक्रमित कुछ मरीज़ों के कारण यह संक्रमण काफी तेज़ी से फैल रहा है। इस बारे में कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कुछ लोगों के शरीर में वायरस काफी तेज़ी से बढ़ते है। इसी कारण से उनमें वायरस लोड काफी ज़्यादा हो जाता है और यही लोग सुपर स्प्रेडर कहलाते हैं।
दरअसल, हो सकता है कि सुपर स्प्रेडर जब भी सांस छोड़ते हैं, तो उनकी सांस से हर बार काफी ज़्यादा वायरस फैलते हों। और ऐसे लोगों के सम्पर्क में जो भी लोग आते हैं उन पर वायरस अटैक होता है। वहीं, सम्पर्क में आए जिन लोगों की इम्युन पावर यानि कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है उनके तुरंत ही संक्रमित होने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है।
सुपर स्प्रेडर्स के कई मामले भारत के तमिलनाडु राज्य से लेकर कई अन्य देशों में आ चुके हैं जहां कोरोना वायरस से संक्रमित एक ही व्यक्ति (सुपर स्प्रेडर) ने कई सारे लोगों को संक्रमित कर दिया। दरअसल, सुपर स्प्रेडर को इस बात की जानकारी ही नहीं होती है कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित है और उसके शरीर में ज़्वायरस लोड ज़्यादा होने के कारण वह कई अन्य लोगों को संक्रमित कर रहा है।
ऐसे में जबकि कोरोना वायरस की कोई भी दवा या वैक्सीन नहीं अभी तक नहीं बन पाई है। तो हमारा आपसे अनुरोध है कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए घर से कम से कम निकलें। यदि घर से बाहर निकलना ज़रूरी है, तो मास्क ज़रूर पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। साथ ही, आयुर्वेद, योग और प्राणायाम से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं।