एक बार फिर 'चर्चा' में आई बिटकॉइन!
फायदे और नुकसान दोनों हैं क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के इस्तेमाल में
JULY 16 (WTN) - क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन एक बार फिर से चर्चा में हैं या फिर कहें कि विवादों में है। दरअसल, जैसा कि आप जानते ही हैं कि हैकर्स ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर दुनिया की दिग्गज हस्तियों समेत कई अन्य लोगों के ट्विटर अकाउंट को हैक लिया था। जिसके बाद हैकर्स ने ट्विटर अकाउंट को फ्री करने के लिए फिरौती के रूप में बिटकॉइन की डिमांड की थी।
आप सोच रहे होंगे कि क्या कारण है कि हैकर्स फिरौती के लिए बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी की ही डिमांड क्यों करते हैं? ऐसा इसलिए, क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी ट्रांज़ैक्शन का कोई भी ब्योरा नहीं होता है। हैकर्स फिरौती मांगते समय अपनी पहचान छिपाने के लिए बिटकॉइन ऐड्रेस का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इसमें हैकर्स का नाम, पता और अन्य निजी जानकारियों का इस्तेमाल नहीं होता है।
दरअसल, क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की डिजिटल करेंसी होती है जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित एक तरह की वर्चुअल करेंसी है। इस करेंसी में पूरी तरह से कोडिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है। इस कोडिंग तकनीक के ज़रिए करेंसी के ट्रांजेक्शन का पूरा डेटा सुरक्षित रखा जाता है। अब चूंकि इसमें ब्लॉकचेन का प्रयोग होता है, इसलिए इसे हैक करना लगभग नामुमकिन है। और इसी कारण से क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की आशंका ना के बराबर है।
अब चूंकि क्रिप्टोकरेंसी वर्चुअल करेंसी है, तो इस पर किसी भी देश की केन्द्रीय बैंक का नियंत्रण नहीं होता है। जहां तक भारत की बात है, तो भारत में सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन की इजाज़त दे दी है। दरअसल, भारत के केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनियमित संस्थाओं को क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार नहीं करने के लिए निर्देश जारी किए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फ़ैसला सुनाते हुए वर्चुअल करेंसी के लेन-देन का रास्ता खोल दिया है।
वैसे एक तरह से क्रिप्टोकरेंसी के कई फ़ायदे भी हैं। क्रिप्टोकरेंसी चूंकि एक डिजिटल करेंसी है, तो इसमें धोखाधड़ी की आशंका ना के बराबर है। वहीं, क्रिप्टोकरेंसी में रिटर्न काफ़ी ज़्यादा होता है। अब चूंकि क्रिप्टोकरेंसी किसी भी देश की केन्द्रीय बैंक से स्वतंत्र है और इसकी कोई भी नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं होता है।
लेकिन ऐसा नहीं है कि क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन हमेशा ही फायदे का सौदा है। दरअसल, वर्चुअल करेंसी में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव कई बार काफी नुकसानदायक साबित होते हैं। पिछले पांच साल का रिकॉर्ड देखा जाए, तो बिटक्वाइन में एक ही दिन में बग़ैर चेतावनी के 40 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज़ की गई है। अब चूंकि बिटकॉइन वर्चुअल करेंसी है, तो इससे लेन देन हमेशा से ही एक जोखिम का सौदा माना जाता है। दरअसल, इस करेंसी का ज़्यादातर इस्तेमाल ड्रग्स सप्लाई और हथियारों की अवैध ख़रीदी बिक्री के लिए किया जाता है।