शोधकर्ताओं का दावा: योग और ध्यान से कोरोना वायरस का इलाज सम्भव
अब प्राकृतिक तरीके से कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने की कोशिशें
JULY 17 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी मानव सभ्यता के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 5,92,757 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना वायरस से अभी तक क़रीब 1,39,52,406 लोग संक्रमित हो चुके हैं।
लेकिन लाखों लोगों की जान ले चुकी कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की अभी तक कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है। हालांकि, पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन और दवा बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य से अभी तक इस दिशा में कोई भी ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए भारत में लोग योग, प्राणायाम, ध्यान,और आयुर्वेद का सहारा ले रहे हैं और इसमें बहुत से लोगों को सफलता हासिल भी हो रही है। इसी कारण से कुछ शोधकर्ता अब प्राकृतिक तरीके से कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का इलाज ढूंढने की वकालत कर रहे हैं।
दरअसल, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, चोपड़ा लाइब्रेरी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक लेख में योग और ध्यान के लाभ के बारे में विस्तार से बताया है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि शोध से पता चला है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों के लिए योग और ध्यान काफी लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जर्नल ऑफ़ अल्टरनेटिव एंड कॉम्प्लिमेंटरी मेडिसिन (JACM) में प्रकाशित इस लेख में बताया गया है कि योग और ध्यान के एंटी इंफ्लेमेटरी प्रभाव COVID-19 के इलाज में काम आ सकते हैं। लेख में दावा किया गया है कि सही तरीके से योग और ध्यान करने से कोरोना वायरस संक्रमण से गम्भीर रूप से संक्रमित मरीज़ को भी आराम मिल सकता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि योग, ध्यान, प्राणायाम और आयुर्वेद सदियों से भारतीय जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। जहां तक योग, ध्यान और प्राणायाम के वैज्ञानिक प्रभाव की बात है, तो इन तीनों के अभ्यास से सांसों पर नियंत्रण स्थापित होता है। यदि कोई भी व्यक्ति योग, ध्यान और प्राणायाम का सही तरीके से अभ्यास करता है, तो उसके शरीर में ऑक्सीजन का बड़ी मात्रा में संचार होता है जिसके कारण फेफड़े मजबूत होते हैं और श्वसन तंत्र सही तरीके से और पूरी क्षमता के अनुसार काम करने लगता है।
वहीं, योग, ध्यान और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से डिप्रेशन से लड़ने में तो मदद मिलती ही है, साथ ही मनुष्य के मस्तिष्क में उचित मात्रा में ऑक्सीजन का प्रवाह होने से मस्तिष्क मजबूत होकर और भी अधिक क्षमता से काम करने लगता है। और इस कारण से तनाव और इंफ्लेमेशन को कम करने में भी मदद मिलती है।
इतना ही नहीं, शोध में कहा गया है कि योग और ध्यान का काफी गहरा संबंध नर्वस सिस्टम और इम्यून सिस्टम से भी है। यदि कोई भी व्यक्ति उचित तरीके से योग और ध्यान का अभ्यास करता है, तो इससे उसका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण की अभी तक कोई भी वैक्सीन और दवा नहीं बन सकी है, तो ऐसे में JACM के प्रधान संपादक जॉन वीक्स ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं से अपील की है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के इलाज़ के लिए ज़्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक तरीका अपनाकर मरीज़ों का इलाज करना चाहिए।
जैसा कि हमने आपको बताया कि कोरोना वायरस की वैक्सीन या दवा बनाने में फिलहाल तो वैज्ञानिकों को कोई भी सफलता हासिल नहीं हो सकी है। ऐसे में शोधकर्ताओं को विश्वास है कि योग और ध्यान से कोरोना वायरस का इलाज करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि COVID-19 के इलाज में योग और ध्यान कितने कारगर साबित हो सकते हैं इसकी वैज्ञानिक जांच किए जाने की ज़रूरत है।