रिसर्च का दावा: मजबूत इम्यून सिस्टम ही कोरोना वायरस से बचने और लड़ने में कारगर
कोरोना वायरस से लड़ने इम्यून सिस्टम की कोशिकाओं में 'टीमवर्क' ज़रूरी
JULY 18 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी मानव सभ्यता के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) से अभी तक क़रीब 5,99,417 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक क़रीब 1,41,94,436 लोग संक्रमित हो चुके हैं।
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है। हालांकि, दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन और दवा को बनाने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से अभी तक वैज्ञानिकों को इस दिशा में कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है, पर फिर भी प्रयास लगातार जारी है।
लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को लेकर तरह-तरह के रिसर्च लगातार जारी है। वैज्ञानिक लगातार यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का मानव शरीर पर क्या और कैसा असर होता है? वहीं, वैज्ञानिक यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण से मानव शरीर किस तरह से लड़ता है?
इधर, कोरोना वायरस पर लगातार हो रहे रिसर्च में से एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता हर किसी व्यक्ति में अलग-अलग होती है और यह क्षमता बहुत कुछ मानव शरीर के इम्यून सिस्टम पर निर्भर करती है। अमेरिका की पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के अस्पताल के शोधकर्ताओं के अनुसार, कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ के लिए उसका इम्यून सिस्टम काफी महत्वपूर्ण है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर यही इम्यून सिस्टम किसी भी मरीज़ की ज़िन्दगी और मौत का कारण हो सकता है।
साइंस पत्रिका में प्रकाशित शोधकर्ताओं के अध्ययन के अनुसार, जब भी मानव शरीर पर किसी भी वायरस का हमला होता है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम इससे निपटने के लिए टी कोशिकाओं का निर्माण करता है। यह टी कोशिकाएं अधिकतर दो स्वरूपों में बनती हैं। पहले तरह की कोशिकाएं वायरस से बचाने का काम करती है, जिन्हें सहायक कोशिकाएं भी कहा जाता है। वहीं, दूसरे तरह की कोशिकाएं, वायरस को मारने का काम करती हैं और इन कोशिकाओं को किलर कोशिकाएं भी कहा जाता है।
दरअसल, शरीर पर वायरस का हमला होने पर यही किलर कोशिकाएं ज़हरीले रसायनों के ज़रिए वायरस को मारने का काम करती हैं। लेकिन किलर कोशिकाओं को इस काम को प्रभावशाली तरीक़े से करने के लिए सहायक कोशिकाओं के साथ सही समन्वय की ज़रूरत पड़ती है। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस से संक्रमित 125 मरीज़ों के अध्ययन के आधार पर दावा किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) से संक्रमित होने वाले कई गम्भीर मरीज़ों के इम्यून सिस्टम में मौजूद किलर कोशिकाओं और सहायक कोशिकाओं के सही समन्वय नहीं पाया गया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, मानव शरीर में तीन तरह के 'इम्युनोटाइप्स' होते हैं। अध्ययन में शामिल कुछ मरीज़ों के इम्युनोटाइप्स में सहायक कोशिकाओं की संख्या ज़्यादा थी और किलर कोशिकाएं दबी हुई थीं। इसका अर्थ यह है कि किसी भी वायरस के ख़तरे की आशंका होने के बाद भी शरीर में वायरस से प्रभावी ढंग से लड़ने वाली कोशिकाएं बहुत कम थीं।
वहीं, दूसरे तरह के इम्युनोटाइप में शामिल मरीज़ों में किलर कोशिकाओं की संख्या ज़्यादा होती है। इसका अर्थ है कि यह किलर कोशिकाएं वायरस को बेहतर तरीके से नष्ट कर सकती हैं, लेकिन इनमें सहायक कोशिकाओं की कमी होती है। और इसी कारण से दोनों तरह की कोशिकाओं के बीच वायरस से लड़ने का समन्वय नहीं बन पाता है। रिसर्च के अनुसार, दूसरे इम्युनोटाइप में कोरोना वायरस संक्रमण से गम्भीर रूप से संक्रमित होने के बाद भी मरीज़ किसी तरह जीवित बच जाता है।
वहीं, तीसरे इम्युनोटाइप में वे मरीज़ शामिल थे जिनका शरीर किसी भी प्रकार की पर्याप्त टी कोशिकाओं का उत्पादन करने में सक्षम नहीं था। यानि कि है इनके शरीर में वायरस से लड़ने वाली किलर कोशिकाओं और सहायक कोशिकाओं की कमी थी। और इसी कारण से इन लोगों में कोरोना वायरस से मौत का ख़तरा ज़्यादा था। हालांकि, इस शोध के शोधकर्ता वभिन्न इम्यून सिस्टम रिस्पॉन्स को पूरी तरह से नहीं समझा सके।
ख़ैर, अब जबकि यह काफी हद तक सिद्ध हो चुका है कि कोरोना वायरस संक्रमण से आप बेहतर तरीके से तभी लड़ सकते हैं जबकि आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होगा। तो योग, प्राणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए अपना अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं जिससे आप कोरोना वायरस का मजबूती से सामना कर सकें।