कोरोना वायरस महामारी के कम्युनिटी ट्रांसमिशन की 'दहलीज' पर खड़ा भारत!
यदि नहीं बरती सावधानी तो भारत में बड़ी तादात में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की आशंका
JULY 21 ( WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के ख़िलाफ़ मानव प्रजाति का संघर्ष लगातार जारी है। चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) की अभी तक कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है। हालांकि, दुनिया भर के वैज्ञानिक COVID-19 की वैक्सीन या दवा को बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से अभी तक इस दिशा में कोई भी ठोस सफलता हासिल नहीं हो सकी है।
इस सबके बीच, अमेरिका, ब्राज़ील और भारत जैसे देशों में कोरोना वायरस संक्रमण के केस तेज़ी से बढ़ते ही जा रहे हैं। जहां तक भारत की बात है, तो इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण भारत में अभी तक क़रीब 28,099 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, इस बीमारी से अभी तक क़रीब 11,56,189 संक्रमित हो चुके हैं।
अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की कोई भी दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कोरोना वायरस बीमारी के केस दिनों-दिन तेज़ी से बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में जबकि कोरोना वायरस के हर दिन हज़ारों की तादात में केस आते जा रहे हैं, ICMR (Indian Council of Medical Research) ने देश में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन फ़ैलने की आशंका ज़ाहिर की है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी वायरस जनित बीमारी में कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी ज्ञात संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना या वायरस से संक्रमित जगह की यात्रा किए बिना ही संक्रमित हो जाता है। दरअसल, यह संक्रमण का तीसरा स्तर होता है और इस स्तर के बाद बड़े पैमाने पर संक्रमण के फैलने की आशंका पैदा हो जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के भारत में चार चरण हैं। पहले चरण में वे लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए गए हैं जो दूसरे देश से संक्रमित होकर भारत में आए। वहीं, कोरोना वायरस के दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है। इस चरण में कोरोना वायरस संक्रमण से वे लोग संक्रमित होते हैं जो किसी ना किसी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आते हैं जो विदेश यात्रा करके लौटे थे।
कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का तीसरा चरण कम्युनिटी ट्रांसमिशन का होता है। बता दें कि इस चरण में ट्रांसमिशन के स्रोत का पता चलना काफी मुश्किल होता है। कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जबकि किसी इलाके की एक बड़ी जनसंख्या कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाए। अब जबकि इस संक्रमण से काफी ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके होते है, तो ऐसे में इस चरण में इसे नियंत्रित कर पाना बहुत ही ज़्यादा मुश्किल हो जाता है।
बात करें कोरोना वायरस संक्रमण के चौथे चरण की, तो यह तब होता है जब संक्रमण स्थानीय स्तर पर महामारी का रूप ले लेता है और संक्रमित मरीज़ों की संख्या में काफी तेज़ी से वृद्धि होती है। इस चरण में कोरोना वायरस महामारी या कोई अन्य वायरस जनित बीमारी किसी क्षेत्र या देश में पूरी तरह फैली हुई मानी जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब वायरस जनित कोई भी बीमारी बड़े पैमाने पर फैलने लगती है, तो इसके बाद हर्ड इम्युनिटी की स्टेज आती है। दरअसल, अगर कोई बीमारी किसी देश की जनसंख्या के बड़े हिस्से में फैल जाती है, तो इस बात की संभावना होती है कि उस बीमारी के ख़िलाफ़ लोगों में प्रतिरोधक क्षमता अपने आप विकसित होने लगती है और इससे संक्रमण रोकने में मदद मिलने लगती है।
हर्ड इम्युनिटी विकसित होने पर लोग अपने आप बीमारी से लड़कर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो बड़ी संख्या में लोग उस बीमारी से 'इम्यून' हो जाते हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके शरीर में बीमारी के ख़िलाफ़ रोग प्रतिरक्षात्मक क्षमता विकसित हो जाती है क्योंकि उनके शरीर में वायरस से मुकाबला करने के लिए ज़रूरी एंटी-बॉडीज़ तैयार होने लगती हैं।
जहां तक COVID-19 की बात है, तो किसी समुदाय में COVID-19 के ख़िलाफ़ 'हर्ड इम्यूनिटी' तभी विकसित हो सकती है, जब क़रीब 60 से 80 प्रतिशत जनसंख्या कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित हो जाए और वे इसके ख़िलाफ़ इम्यून हो जाए। अब जबकि ज़्यादातर लोग वायरस से इम्यून हो जाते हैं, तो फिर वायरस का फैलाव लगभग मुश्किल हो जाता है और एक लम्बी समय सीमा के बाद इसका फैलाव भी रुक जाता है।
ख़ैर, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की कोई भी दवा या वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। तो ऐसे में आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। आप योग, प्राणायाम और आयुर्वेद का सही उपयोग करके ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी विकसित कर सकते हैं। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण से बचने मास्क का इस्तेमाल करें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।