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...तो 'इस कारण' से कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने में हो रही है देरी!

Saturday - July 25, 2020 12:37 pm , Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए जारी हैं रिसर्च
कोरोना वायरस की वैक्सीन के लिए जारी हैं रिसर्च

शोधकर्ताओं का दावा: कोरोना वायरस का स्पाइक प्रोटीन बदल रहा अपना आकार

JULY 25 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी अब काफी विकराल रूप धारण कर चुकी है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 6,41,814 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण अभी तक क़रीब 1,59,47,291 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

इधर, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) की अभी तक कोई भी वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, दुनिया भर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन को पूरी तरह से विकसित करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से दिशा में कोई भी ठोस सफलता अभी तक हासिल नहीं हो सकी है।

दरअसल, कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में वैज्ञानिको को चुनौती का सामना इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि SARS-CoV-2 नाम के इस वायरस में कई बार बदलाव हो चुका है यानि कि यह कई बार म्यूटेट हो चुका है। और इसी बदलाव से वैक्सीन की खोज में लगे वैज्ञानिकों और इस बारे में शोध कर रहे शोधकर्ताओं को परेशान कर रखा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन के बदलाव के बारे में बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के डॉ. बिंग चेन और उसके सहयोगी शोधकर्ताओं ने शोध किया है। बता दें कि इस बदलाव के बारे में पता करने के लिए क्रायोजनिक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (Cryo-EM) तकनीक का उपयोग किया।

बता दें कि लगातार शोध में जुटे शोधकर्ताओं की यह रिसर्च एक साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन (Spike Protien) के बारे में नई जानकारी का पता चला है। दरअसल, शोधकर्ताओं का दावा है कि स्पाइक प्रोटीन मनुष्य की कोशिका से जुड़ने के बाद अपना रूप बदल लेता है। शोधकर्ताओं का दावा है कि स्पाइक प्रोटीन अपने आप ख़ुद को मोड़ सकता है। इतना ही नहीं, स्पाइक प्रोटीन अपने आप को कठोर कर हेयरपिन के आकार में ख़ुद को बदल लेता है।

SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन के बारे में शोधकर्ताओं का दावा है कि इसका आकार सिर पर पहने जाने वाले ताज के नुकीले कांटों की तरह दिखता है। और यही स्पाइक प्रोटीन मानवीय कोशिका में संक्रमण की शुरुआत करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, स्पाइक प्रोटीन मानवीय कोशिका में घुसने से पहले ख़ुद को एक एंजाइम ACE2 रिसेप्टर से जोड़ लेता है और ख़ुद के तरह की प्रतियां बनाने लगता है। वहीं, ACE2 रिसेप्टर से जुड़ने के बाद स्पाइक प्रोटीन नाटकीय रूप से हेयरपिन के आकार में बदल जाता है। वहीं, शोध में दावा किया गया है कि स्पाइक प्रोटीन के आकार में यह बदलाव वह मानवीय कोशिका से ज़ुड़ने से पहले भी कर सकता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन के नए आकार में आने से उसे टूटने से बचने में मदद मिल सकती है। दरअसल, SARS-CoV-2 वायरस अपने कठोर आकार के कारण ही बहुत सी सतहों पर काफी लम्बे समय तक बिना ख़त्म हुए रह सकता है।

अब जबकि SARS-CoV-2 वायरस कठोर रूप धारण कर लेता है, तो हो सकता है कि इसी कारण से यह मानव शरीर के इम्यून सिस्टम से भी बच पा रहा हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि SARS-CoV-2 वायरस का कठोर ठोस नया आकार आसानी से एंटीबॉडी को धोखे में रख सकता है। और इसी कारण से मानव शरीर के एंटीबॉडी इस वायरस को निष्प्रभावी नहीं कर पा रहे हैं।

दरअसल, शोधकर्ताओं का अनुमान है कि मानवीय कोशिका में घुसने के बाद एक आम प्रोटीन पर एंटीबॉडी जो काम कर पाती है वह काम SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन पर नहीं कर पा रही है।शोधकर्ताओं का दावा है कि मानव कोशिका में प्रोटीन के प्रवेश करने के पहले और बाद में ग्लायकैन्स (Glycans) नाम के अणु इस प्रोटीन में फैले होते हैं जिससे इम्यून सिस्टम को इसके बारे में पता ही नहीं चला पाता है।

हालांकि, इस समय बहुत सी वैक्सीन इस आधार पर विकसित की जा रही हैं जिसमें वैक्सीन, स्पाइक प्रोटीन के हिसाब से इम्यून सिस्टम को सक्रिय करती है। लेकिन, स्पाइक प्रोटीन के आकार में बदलाव से वैक्सीन का प्रभाव कम हो सकता है। पर अब इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर स्पाइक प्रोटीन स्थिर नहीं रहता है, तो एंटीबॉडी तो पैदा होंगी,  लेकिन वे वायरस को रोकने में सक्षम नहीं होंगी।

ख़ैर, अब इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारी मिलने के बाद कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन बनाने में जुटे वैज्ञानिकों को आशा है कि इस महत्वपूर्ण जानकारी के मिलने से उन्हें वैक्सीन विकसित करने में और भी मदद मिल सकती है। लेकिन, जब तक कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन नहीं बन जाती है, आप ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं जिससे आप इस संक्रामक बीमारी से ख़ुद का बचाव कर सकें।