ई-कॉमर्स कंपनियों के उपभोक्ताओं के अधिकार होंगे अब और भी ज़्यादा सुरक्षित
ऑनलाइन शॉपिंग के लिए बने नए नियम उपभोक्ता हितैषी
JULY 25 (WTN) - टेक्नोलॉजी के इस दौर में आप ऑनलाइन शॉपिंग तो करते ही होंगे। दरअसल, ऑनलाइन शॉपिंग का अपना अलग ही क्रेज़ है। लेकिन, देखा गया है कि ऑनलाइन शॉपिंग में कई लोग धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, और उनको मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए कई नियम हैं, लेकिन फिर भी ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी का शिकार होने पर अभी तक सही न्याय नहीं मिल पा रहा था।
लेकिन, मोदी सरकार अब ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले उपभोक्ताओं के उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए 27 जुलाई, 2020 से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नए नियम लागू करने जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 (Consumer Protection Act 2019) के अंदर ही ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी नए नियम लागू होंगे। दरअसल, देश में पहली बार ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कोई गाइडलाइंस बनी हैं। इससे पहले के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कोई भी नियम नहीं थे.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए पहली बार उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नियम लागू किए जा रहे हैं। और इन नियमों के लागू हो जाने के बाद से ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के साथ अब किसी भी तरह की धोखाधड़ी के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नए नियम लागू होने के बाद यदि ग्राहकों के साथ ऑनलाइन शॉपिंग में धोखाधड़ी की गई, तो अब ई-कॉमर्स कंपनियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नए ई-कॉमर्स कानून लागू होने से ग्राहकों को मिलने वाली सहूलियतें तो बढ़ेंगी ही, साथ ही इसमें ग्राहकों को बहुत से अधिकार भी मिलेंगे।
नए उपभोक्ता कानून में अब ई-कॉमर्स कंपनियों को ग्राहकों के हितों का और भी ज़्यादा ध्यान रखना पड़ेगा। फिर चाहे वह कंपनियां देश में रजिस्टर्ड हों या फिर विदेश में। वहीं, नियमों का उल्लंघन करने पर अब जुर्माने के साथ ही सज़ा का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही अगर कोई ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर बुक कर बाद में उस ऑर्डर को कैंसिल कर देता है, तो ई-कॉमर्स कंपनियां इसका चार्ज नहीं ले सकेंगी। इतना ही नहीं, घटिया सामान डिलेवरी करने पर भी दंड का प्रावधान किया गया है। वहीं, अब रिफंड, एक्सचेंज और गारंटी-वारंटी जैसे सभी जानकारियों को ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने पोर्टल पर स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराना होगा। साथ ही ई-कॉमर्स कंपनियों को यह भी बताना होगा कि जो प्रोडक्ट वे अपने पोर्टल पर बेच रहे हैं वो किस देश का है और किस देश में बना है। इतना ही नहीं, गलत या लुभाने वाली प्राइस और हिडन चार्ज पर भी ई-कॉमर्स कंपनियों की जवाबदेही तय की गई है।
वहीं, नए अधिनियम के नियमों के अनुसार, ई-कॉमर्स कंपनियों की शिकायत के लिए अब एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, और इस अधिकारी को एक निश्चित समय सीमा में ग्राहक की शिकायतों का निपटारा करना होगा। साफ है कि ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते क्रेज़ को लेकर बनाए गए यह नए नियम उपभोक्ताओं के अधिकारों को काफी सुरक्षित रखेंगे।