...तो क्या संक्रमण के 9 दिनों के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ नहीं फैलाता संक्रमण?
शोध का दावा: 9 दिनों के बाद मरीज़ के शरीर में ज़्यादा सक्रिय नहीं रहता कोरोना वायरस
JULY 30 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ मानव प्रजाति का संघर्ष लगातार जारी है। चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण 200 से ज़्यादा देशों में फैल चुकी है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण पूरी दुनिया में अभी तक क़रीब 6,70,256 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की अभी तक कोई भी वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन बनाने के लिए वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से इस दिशा में वैज्ञानिकों को कोई भी ठोस सफलता अभी तक हासिल नहीं हो सकी है। इधर, इस सबके बीच, वैज्ञानिक लगातार इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण किन कारणों से फैलता है और किन लोगों को यह कम या ज़्यादा संक्रमित करता है, आदि?
वहीं, तमाम तरह के अध्ययनों में यह अध्ययन भी किया जा रहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मरीज़ की स्थिति और उसके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। वहीं, यह अध्ययन भी किया जा रहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद संक्रमित व्यक्ति किस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण फैला सकता है?
इसी कड़ी में यूके के शोधकर्ताओं ने 98 शोधों के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद दावा किया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित किसी मरीज़ के गले, नाक और मल में यदि नौ दिनों के बाद भी कोरोना वायरस की मौजूदगी पाई जाती है, तो भी उससे संक्रमण नहीं फैलता है। यानि कि शोध का दावा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ नौ दिनों के बाद संक्रमण नहीं फैलता है। इन शोधों में SARS-CoV-2 के 79 शोधों के अलावा SARS-CoV-1 के 8 और MARS-CoV के 11 शोधों का अध्ययन शामिल है।
इस अध्ययन के अनुसार, वायरस का जेनेटिक पदार्थ RNA, गले में 17 से 83 दिन तक रहता है। लेकिन, यह RNA ख़ुद संक्रमण नहीं फैलाता है। शोधपत्र में दावा किया गया है कि SARS-CoV-2 का RNA 17 से 83 दिनों तक तक श्वसन तंत्र और मल में पाया जाता है। लेकिन, संक्रमण में सक्षम वायरस कम ही समय के लिए सक्रिय रह पाता है। इसी कारण से किसी मरीज़ में SARS-CoV-2 के RNA की मौजूदगी का यह अर्थ नहीं है कि मरीज़ से संक्रमण फैल सकता है।
वहीं, शोध के अनुसार, SARS-CoV-2 से संक्रमित मरीज़ों में वायरल लोड बुखार के पहले सप्ताह में बहुत ज़्यादा होता है। और इसी कारण से किसी व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर पहले 5 दिन में सबसे ज़्यादा संक्रमण फैलने की आशंका होती है। इसी कारण से कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर मरीज़ को शुरुआती दिनों में ही आईसोलेट करना काफ़ी ज़रूरी है जिससे वह अन्य लोगों को संक्रमित न कर सके।
साफ है कि अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 9 दिनों के बाद मरीज़ संक्रमण नहीं फैलाता है। कहा जा सकता है कि यह अध्ययन एक तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ 9 दिनों के बाद संक्रमण नहीं फैलाता है तो कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ को ज़्यादा दिनों तक हॉस्पिटल में रखने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
ख़ैर, जब तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई वैक्सीन नहीं बन जाती है या फिर इसके केस आने बहुत कम नहीं हो जाते हैं। तब तक, घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वहीं, डॉक्टर की सलाह से योग, प्रणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, विटामिन-डी की शरीर में आपूर्ति के लिए कम से कम 20 मिनिट तक सूर्य की रोशनी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहें।