'फिशिंग' का शिकार होने से बचने बरतें 'यह' सावधनियां
यदि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में की यह ग़लतियां, तो हो सकते हैं 'फिशिंग' का शिकार!
JULY 30 (WTN) - टेक्नोलॉजी के इस आधुनिक दौर में आप बैंक, वित्त और शॉपिंग संबंधित कामों के लिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल तो करते ही होंगे। दरअसल, बैंक में या अन्य दफ्तरों में आपको अपने कामों के लिए पहले घंटों लाइन में लगकर अपना कीमती समय बर्बाद करना पड़ता। लेकिन, अब वहीं काम इंटरनेट की मदद से चंद सेकण्ड्स में हो जाते हैं।
वहीं, कोरोना वायरस संकट और लॉकडाउन के कारण पहले की तुलना में अब ज़्यादा से ज़्यादा लोग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने लगे हैं। दरअसल, स्मार्ट फ़ोन के ज़्यादा इस्तेमाल होने और बैंकिंग ट्रांजेक्शन और शॉपिंग के लिए मोबाइल पर कई ऐप होने के कारण ऑनलाइन ट्रांजेक्शन अब पहले की तुलना में ज़्यादा हो गया है।
लेकिन, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़ने लगे हैं। दरअसल, ऑनलाइन फ्रॉड के लिए हैकर्स 'फिशिंग' का सहारा ले रहे हैं। वहीं, यदि आप फिशिंग का शिकार बने, तो आपके बैंक से हैकर्स न केवल पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं, बल्कि ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 'फिशिंग' एक तरह की इंटरनेट के ज़रिए चोरी है। फिशिंग का इस्तेमाल कर हैकर्स आपकी गोपनीय वित्तीय जानकारियां जैसे बैंक अकाउंट नम्बर, नेट बैंकिंग पासवर्ड, क्रेडिट या डेबिट कार्ड नम्बर और पर्सनल इंफॉर्मेशन हासिल कर सकते हैं। ऐसे में यदि आपने लापरवाही बरती और सतर्क नहीं रहे, तो आप भी फिशिंग का शिकार हो सकते हैं।
बता दें कि हैकर्स आपको फिशिंग का शिकार बनाने के लिए काफी तरीक़े अपनाते हैं। ऐसे में आपको काफी सतर्क रहने की ज़रूरत है। जैसे, नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय हमेशा एड्रेस बार में सही URL ही टाइप करें। जब आप सुनिश्चित हो जाएं कि आपने प्रमाणीकृत साइट ही ओपन की है, तभी लॉगइन पेज पर ही अपना यूज़र आईडी और पासवर्ड एंटर करें। वहीं, पूरी कोशिश करें कि नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय नेट कैफे या पब्लिक Wi-Fi का इस्तेमाल न करें।
वहीं, नेट बैंकिंग का यदि आप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पहले यह सुनिश्चित करें कि लॉगइन पेज का URL 'https://' के साथ शुरू हो ना कि 'http://' से। बता दें कि 'https' में 'S' से तात्पर्य है 'Secure'। और यह 'S' इस बात का प्रतीक है कि वेब पेज में एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, जब भी नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें, तो हमेशा ब्राउज़र और वेरीसाइन प्रमाण पत्र के दाहिनी ओर सबसे नीचे लॉक यानि ताले का चिह्न ज़रूर होना चाहिए।
इतना ही नहीं, कभी भी किसी को भी कॉल, मैसेज या ई-मेल के ज़रिए अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक डिटेल, OTP, नेट बैंकिंग और ऐप लॉगिन आईडी पासवर्ड और क्रेडिट-डेबिट कार्ड की डिटेल्स न बताएं। याद रखिए, यदि आपने ग़लती या लापरवाही की या फिर लालच दिखाया, तो हैकर्स आपको फिशिंग के ज़रिए आर्थिक क्षति पहुंचा सकते हैं।