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घरों और संस्थानों में 'निष्क्रिय' पड़े गोल्ड का अब होगा सही इस्तेमाल

Friday - July 31, 2020 12:36 pm , Category : WTN HINDI
देश में बड़ी तादात में रखा है 'ग़ैर-क़ानूनी' गोल्ड
देश में बड़ी तादात में रखा है 'ग़ैर-क़ानूनी' गोल्ड

मोदी सरकार के एमनेस्टी प्रोग्राम से ग़ैर-क़ानूनी गोल्ड आएगा सामने!

JULY 31 (WTN) - विश्व की प्राचीनतम सभ्यता वाले देश भारत में सोना यानि गोल्ड के प्रति बहुत ही ज़्यादा दीवानगी है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि प्रचीन समय से ही भारत में गोल्ड, सामाजिक प्रतिष्ठा, बचत और निवेश के लिए इस्तेमाल होता आया है। भारत में विवाह में अभी भी वधु को गोल्ड के आभूषण देने की परम्परा रही है। दरअसल, हर भारतीय की यह मानसिकता रही है कि यह क़ीमती पीली धातु (गोल्ड) आर्थिक ज़रूरत होने पर सबसे बड़ा सहारा है।

यही कारण है कि एक अनुमान के अनुसार, पूरे भारत में लोगों के घरों में क़रीब 25,000 टन गोल्ड रखा हुआ है जिसमें से ज़्यादातर गोल्ड ग़ैर-क़ानूनी रूप से घरों में रखा हुआ है। वहीं, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश को काफी मात्रा में क़ीमती विदेशी मुद्रा अमेरिकन डॉलर का इस्तेमाल गोल्ड के आयात के लिए करना पड़ता है। ऐसे में मोदी सरकार गोल्ड को लेकर एक बड़ी योजना पर काम कर रही है।

जानकारी के अनुसार, घरों या अन्य जगहों पर रखे गए ग़ैर-क़ानूनी गोल्ड के लिए मोदी सरकार एमनेस्टी प्रोग्राम (आम-माफ़ी कार्यक्रम) पर विचार कर रही है। दरअसल, इस प्रोग्राम के ज़रिए सरकार की मंशा है कि गोल्ड के ख़रीदने और बेचने पर होने वाली टैक्स चोरी को रोका जा सके और ​आयात पर निर्भरता कम हो सके। बता दें कि मीडिया से मिली जानकारी अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष पेश किए गए एक प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार लोगों से अपील करेगी कि वे ग़ैर-क़ानूनी रूप से रखे गोल्ड के बारे में टैक्स विभाग को जानकारी दें। यदि वे ऐसा करते हैं, तो इसके लिए उन्हें सिर्फ लेवी या पेनाल्टी ही देनी होगी। हालांकि, बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है।

इससे पहले, साल 2015 में मोदी सरकार ने राज्यों की सहमति से तीन प्लान के बारे में जानकारी दी थी जोकि घरों में रखे क़रीब 25,000 टन गोल्ड, संस्थानों द्वारा फिजिकल गोल्ड रखने और गोल्ड आयात कम करने के बारे में थे। दरअसल, मोदी सरकार की मंशा है कि निवेश के लिए लोगों के पास वै​कल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएं, जिससे गोल्ड पर निवेश की निर्भरता कम हो सके।

हालांकि, मोदी सरकार की यह योजना आम लोगों के बीच पॉपुलर नहीं हो सकी क्योंकि देश में बहुसंख्यक लोग अपने पास रखे सोने को बैंकों में जमा करना नहीं चाहते थे। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत में घरों में रखे सोने का एक बड़ा हिस्सा आभूषणों के रूप में है और इन आभूषणों को विशेषकर स्त्रियां त्योहार और विवाह आदि समारोह में पहनती हैं। वहीं, लोगों को इस योजना से यह डर था कि यदि उन्होंने गोल्ड के बारे में जानकरी दी, तो उन्हें टैक्स विभाग द्वारा दण्डित किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज़्यादातर लोगों के पास बिना बिल का गोल्ड है।

अब गोल्ड के लिए मोदी सरकार जो एमनेस्टी प्रोग्राम ला सकती है उसके मुताबिक़, जो लोग अपने गोल्ड की जानकारी देंगे, उन्हें क़ानूनी रूप से रखें अपने गोल्ड का एक हिस्सा सरकार के पास कुछ समय के लिए रखना होगा। दरअसल, मोदी सरकार गोल्ड का आयात कम करने के पक्ष में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल गोल्ड के भाव में अब तक क़रीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।

ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना काल में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता के माहौल में निवेशक शेयर के बजाए गोल्ड में सुर​क्षित निवेश विकल्प को वरीयता दे रहे हैं। दिनों-दिन गोल्ड के बढ़ते दाम से देश को बड़ी मात्रा में क़ीमती विदेशी मुद्रा गोल्ड के आयात पर ख़र्च करना पड़ रही है। ऐसे में मोदी सरकार एमनेस्टी प्रोग्राम के तहत घरों और संस्थाओं के पास रखे निष्क्रिय गोल्ड को बाहर निकालकर उसे उपयोग में लाने पर विचार कर रही है।