जानिए क्यों रूस की कोरोना वैक्सीन के दावे पर हैं आशंकाएं?
WHO ने रूस की कोरोना वैक्सीन पर खड़े किए सवाल
AUG 05 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इस समय मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। 200 से ज़्यादा देशों में फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) इस लेख को लिखे जाने तक, पूरी दुनिया में अभी तक क़रीब 7,04,438 लोगों की जान ले चुकी है।
वहीं, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन नहीं बन पाई है। हालांकि, दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से इस दिशा में अभी तक कोई भी प्रामाणिक सफलता हासिल नहीं हो सकी है।
इस सबके बीच, रूस ने यह घोषणा कर सबको चौका दिया है कि रूस में अक्टूबर महीने से कोरोना वायरस की वैक्सीन का उत्पादन शुरू होने जा रहा है। लेकिन, वहीं ख़ास बात यह है कि रूस का कहना है कि वैक्सीन के उत्पादन के साथ-साथ वैक्सीन के फेज़-3 का क्लीनिकल ट्रायल भी जारी रहेगा। लेकिन, रूस के वैक्सीन बनाने के दावे पर अब WHO (World Healrh Organization) यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई आशंकाएं ज़ाहिर की हैं।
दरअसल, रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने हाल ही में घोषणा की थी कि उनका देश अक्टूबर महीने से COVID-19 की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर वैक्सीन कैंपेन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रूस के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, यह वैक्सीन नि:शुल्क होगी और इसे सबसे पहले डॉक्टर्स और अध्यापकों को दिया जाएगा। लेकिन, वहीं रूसी स्वास्थ्य ने यह कहकर सबको चौका दिया कि उत्पादन के साथ-साथ वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल भी जारी रहेगा और इसमें सुधार की कोशिश की जाएगी!
इधर, रूस में कोरोना वायरस वैक्सीन के फेज़-3 के क्लीनिकल ट्रायल के पहले ही वैक्सीन उत्पादन के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रूस से वैक्सीन उत्पादन के लिए बनाई गई गाइडलाइन का पालन करने के लिए कहा है। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कई बार ऐसा होता है कि कुछ शोधकर्ता दावा करते हैं कि उन्होंने कोई महत्वपूर्ण वैक्सीन की खोज कर ली है, लेकिन उस वैक्सीन के असरदार होने के संकेत मिलने और क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों से गुजरने में काफ़ी अंतर होता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुरक्षित वैक्सीन बनाने को लेकर कई नियम बनाए हैं और इसे लेकर एक गाइडलाइन भी है। इस गाइडलाइन का पालन करने से यह पता चलता है कि वैक्सीन के कहीं साइड इफेक्ट तो नहीं हैं, या फिर कहीं इससे फायदे से ज़्यादा नुकसान तो नहीं हो रहा है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी वेबसाइट पर कोरोना वायरस की वैक्सीन की क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रहीं 25 वैक्सीन को सूचीबद्ध किया है जबकि 139 वैक्सीन अभी प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं। वहीं, तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में कुछ वैक्सीन ही हैं लेकिन इसमें रूस की वैक्सीन शामिल नहीं है।
बता दें कि रूस में 'गमालेई इंस्टिट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी' द्वारा वैक्सीन के उत्पादन का दावा किया गया है और इसकी सुरक्षा की पुष्टि की गई। हालांकि, रिसर्च के ढांचे और टाइम फ्रेम को देखने के बाद विशेषज्ञ इसे वैक्सीन का पहला चरण ही मान रहे हैं। दरअसल, कोई भी वैक्सीन ट्रायल के पहले चरण में मनुष्यों के एक छोटे समूह पर वैक्सीन सेफ्टी की जांच होती है। वहीं, बड़े पैमाने पर वैक्सीन का ट्रायल करने से पहले ये ट्रायल सालों तक चल सकता है।
अब जबकि रूस द्वारा कोरोना वैक्सीन बनाने के दावों पर आशंकाएं ज़ाहिर की जा रही हैं और अभी भी कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने में देरी है, तब तक घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वहीं, डॉक्टर की सलाह से योग, प्रणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, विटामिन-डी की शरीर में आपूर्ति के लिए कम से कम 20 मिनिट तक सूर्य की रोशनी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहें।