निर्यात पर निर्भर स्वीडन की अर्थव्यवस्था ने कोरोना संकट में पेश की मिसाल
कोरोना संकट में स्वीडन की अर्थव्यवस्था को तुलनात्मक रूप से हुआ कम नुकसान
AUG 07 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इस समय मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन और अन्य कारणों से दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इतना ही नहीं, यहां तक कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी कोरोना संकट के कारण बुरे दौर से गुजर रही है।
लेकिन, इस सबके बीच, जबकि दुनिया के लगभग सभी देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, स्वीडन एक ऐसा देश है जो कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से पैदा हुए आर्थिक संकट की चपेट में अन्य देशों की तुलना में सबसे कम दिख रहा है। जी हां, आपकी आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन जैसे कठोर फैसले न लेने वाले स्वीडन की GDP में पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में मामूली सी गिरावट दर्ज़ की गई है।
बता दें कि स्वीडन में जनवरी से मार्च की पहली तिमाही के GDP के जो आंकड़े थे, उनकी तुलना में अप्रैल से जून के बीच की दूसरी तिमाही में GDP में 8.6% की गिरावट दर्ज़ की गई। यदि यूरोप के अन्य देशों से स्वीडन की अर्थव्यवस्था की तुलना की जाए, तो अन्य देशों की अर्थव्यवस्था की तुलना में स्वीडन की अर्थव्यवस्था को मामूली नुकसान ही हुआ है। जहां स्वीडन की अर्थव्यवस्था में सिर्फ 8.6% की गिरावट दर्ज़ की गई है वहीं स्पेन की अर्थव्यवस्था 18.5% की, फ्रांस की अर्थव्यवस्था में 13.8% की और इटली की अर्थव्यवस्था में 12.4% की गिरावट आई है। हालांकि, कोरोना संकट के कारण स्वीडन की अर्थव्यवस्था में अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में कम गिरावट दर्ज़ की गई हो, लेकिन स्वीडन की अर्थव्यवस्था में यह पिछले 40 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है।
अब जबकि अन्य देशों की तुलना में स्वीडन की अर्थव्यवस्था को तुलनात्मक रूप से कम नुकसान हुआ है, तो इसके बाद अर्थशास्त्री उन कारणों का पता लगा रहे हैं जिनके कारण स्वीडन की अर्थव्यवस्था तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर पाई। दरअसल, स्वीडन की सरकार ने कोरोना संकट के समय देश में एक बार भी सम्पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया। हालांकि, कोरोना महामारी से निपटने के लिए वहां पर शुरू से ही सोशल डिस्टेंसिंग की गाइडलाइन पर ज़ोर दिया गया। साथ ही वर्क फ्रॉम होम पर ज़्यादा से ज़्यादा फ़ोकस किया गया। इतना ही नहीं, कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को कम से कम करने के कदम भी उठाए गए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वीडन की अर्थव्यवस्था बड़े तौर पर निर्यात पर निर्भर है इसलिए कोरोना संकट के समय यहां पर व्यवसाय और व्यापार ज़्यादातर चालू ही रहे। लेकिन, दूसरे देशों में लॉकडाउन लगने के कारण मांग कम होने के कारण स्वीडन की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
वहीं यूरोप में जब कोरोना वायरस संक्रमण चरम पर था, तब भी स्वीडन में सम्पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया गया। दरअसल, स्वीडन की सरकार का तर्क रहा है कि लॉकडाउन न लगाकर और समाज को खुला रखने से बेरोज़गारी कम से कम होगी और उद्योगों और व्यापार पर भी कम असर पड़ेगा। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर काफी हद तक निर्भर स्वीडन की अर्थव्यवस्था अन्य देशों की तुलना में सबसे कम प्रभावित हुई है।
हालांकि, यह बात सही है कि कोरोना संकट में स्वीडन की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है, लेकिन अभी भी स्वीडन में मंदी के हालात नहीं हैं। तो कहा जा सकता है कि विदेशी व्यापार पर ज़्यादातर निर्भर स्वीडन ने कोरोना संकट में भी अन्य देशों की तुलना में अपनी अर्थव्यवस्था को संभाले रखा वो भी तब, जबकि अन्य देशों में लॉकडाउन के कारण मांग कम होने से स्वीडन से निर्यात काफी प्रभावित हुआ।