अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रभावित करने की विदेशी शक्तियों की कोशिशें!
रूस, चीन और ईरान की अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 'विशेष दिलचस्पी'
AUG 08 (WTN) - चार साल में एकबार होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से आगामी चार साल के लिए विश्व राजनीति की दशा और दिशा दोनों ही तय होती हैं। वहीं, देखा गया है कि शीत युद्ध के समय से ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी शक्तियां ज़रुरत से ज़्यादा रुचि लेती और हस्तक्षेप करती नज़र आई हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2016 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन पर आरोप लगा था कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प को जीत दिलाने के लिए पुतिन ने कुछ हथकंडे भी अपनाए।
वहीं, अब इधर, अमेरिका के प्रमुख खुफिया अधिकारी और नेशनल काउंटर इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सेंटर के डायरेक्टर विलियम इवानिना ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि विश्व की दूसरे नम्बर की आर्थिक शक्ति चीन नहीं चाहता है कि डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बनें। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिका के दोबारा राष्ट्रपति न बने इसके लिए चीन बाकायदा रणनीति भी बना रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता कि ट्रेड वॉर को लेकर काफी समय से अमेरिका और चीन के बीच तनाव का माहौल है। वहीं, चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के अमेरिका में बड़ी तादात में फैलने के कारण अब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं, दक्षिण चीन सागर में चीन की 'दादागिरी' पर अंकुश लगाने के लिए अमेरिका की दखलंदाजी के बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
इसी कारण से आरोप लगाए जा रहे हैं कि चीन की कोशिश हो सकती है कि डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर से राष्ट्रपति का चुनाव न जीत सकें, और इसी कारण से चीन, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप कर रहा है। इतना ही नहीं, खुफिया रिपोर्ट में तो यह तक कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए ईरान, चीन का साथ दे रहा है। वहीं, अपने हितों के कारण रूस भी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में पैतरेबाज़ी कर रहा है।
लेकिन, खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, जहां रूस, डोनाल्ड ट्रम्प के विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन के ख़िलाफ़ काम कर रहा है और ट्रम्प की छवि और भी बेहतर करने की कोशिश भी कर रहा है। तो वहीं, चीन और ईरान मिलकर डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालांकि, रूस जितना सक्रिय होकर हस्तक्षेप कर रहा है उतना सक्रिय होकर हस्तक्षेप चीन नहीं कर रहा है। लेकिन, आरोप हैं कि चीन की कोशिशें हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति न बनें क्योंकि ट्रम्प ही दक्षिण चीन सागर में चीन के 'अतिक्रमण' के इरादों के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा रोड़ा है।
इधर, खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ऐसे राजनेताओं पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है जो चीन के हित का विरोध करते रहे हैं, और चीन को इस काम में अपने नए दोस्त ईरान का पूरा सहयोग मिल रहा है। इसी कारण से आरोप है कि ईरान, ट्रम्प और अमेरिका के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर ग़लत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहा है। ख़ैर, अब यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि रूस, चीन और ईरान, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को कितना प्रभावित कर पाते हैं?