जानिए रूस की COVID-19 की वैक्सीन बनाने के दावों पर क्यों है 'संदेह'?
तो क्या COVID-19 की वैक्सीन के ज़रिए रूस अपने नागरिकों की जान से कर रहा है 'खिलवाड़"?
AUG 13 (WTN) - तो यदि रूस की पुतिन सरकार के दावे पर विश्वास किया जाए, तो रूस ने COVID-19 की वैक्सीन को बनाने में सफलता हासिल कर ली है। वहीं, अपनी इस कथित सफलता को रूस की पुतिन सरकार बड़े ही ज़ोर शोर से प्रचारित भी कर रही है। इतना ही नहीं,
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने अपने बयान में पूरे विश्वास के साथ कहा है, "रूस द्वारा COVID-19 की वैक्सीन को बनाना दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण क़दम है। यह वैक्सीन पूरी तरह से कारगर है और COVID-19 के ख़िलाफ़ प्रतिरोधी क्षमता को स्थायी करने में पूरी तरह से सक्षम है। मैंने अपनी दो बेटियों में एक बेटी पर इस वैक्सीन का प्रयोग किया है, और वह अच्छा महसूस कर रही है।"
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस ने COVID-19 की वैक्सीन का नाम अपने और दुनिया के पहले अंतरिक्ष यान स्पूतनिक के नाम पर स्पूतनिक-V रखा है। पुतिन सरकार का कहना है कि COVID-19 की वैक्सीन प्रभावी है, और इस वैक्सीन को देश की नियामक संस्था की आधिकारिक अनुमति के बाद ही इस्तेमाल किया जा रहा है। ख़ैर, रूस ने COVID-19 की वैक्सीन बनाकर उसकी कथित सफलता का दावा तो कर दिया है। लेकिन, रूस के इस दावे पर न तो WHO (World Health Organization) विश्वास कर रहा है और न ही कई देश।
दरअसल, रूस सरकार के COVID-19 की सफल और सुरक्षित वैक्सीन बनाने के दावों को संदेह की नज़र से देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कई देशों का मानना है कि किसी भी वैक्सीन की क्लीनिकल ट्रायल के बाद उसके सफल और सुरक्षित घोषित करने की जो प्रक्रिया है, उस प्रक्रिया के पूरा होने के पहले ही रूस ने वैक्सीन की सटीकता का जो दावा किया है वह पूरी तरह से ग़लत है। यही कारण है कि रूस की COVID-19 की इस वैक्सीन को बनाने के दावे को अमेरिका और कई यूरोपीय देश सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
दरअसल, इन देशों का आरोप है कि रूस ने वैक्सीन के लिए ज़रूरी परीक्षण की सारी प्रक्रियाओं के पूरा होने से पहले ही जल्दबाज़ी में वैक्सीन के सफल और सुरक्षित होने की घोषणा कर दी है, और इस कारण से रूस के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दरअसल, COVID-19 की वैक्सीन बनाने के लिए कई देशों के वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों में सफलता अभी किसी भी देश को नहीं मिल पाई है। वैसे, फिलहाल कुछ देश COVID-19 की वैक्सीन को बनाने के अंतिम परीक्षणों के दौर में हैं। अब जबकि रूस की पुतिन सरकार ने क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों को पूरा किए बिना ही COVID-19 की वैक्सीन के सफल और सुरक्षित होने का दावा किया है, तो इस पर कई विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन सरकार जल्दबाज़ी दिखाकर अपने ही नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है।
इधर, विशेषज्ञों को रूस की इस वैक्सीन पर संदेह का सबसे बड़ा कारण यह है कि आमतौर पर किसी भी वैक्सीन के ट्रायल में कई सालों का समय लग जाता है, लेकिन रूस ने वैक्सीन को सिर्फ दो ही महीनों में बनाने का दावा कर दिया है। इतना ही नहीं, न केवल रूस ने क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों को पूरा किए बिना ही COVID-19 की वैक्सीन के सफल और सुरक्षित होने का दावा कर दिया है बल्कि उसने WHO के साथ भी इस वैक्सीन के संबंध में कोई भी जानकारी साझा नहीं की है।
बता दें कि रूस ने इस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के केवल पहले चरण के नतीजों को ही सार्वजनिक किया है और इसी के आधार पर रूस ने परीक्षण के सफल होने का दावा किया है। वहीं, वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल का दूसरा चरण 13 जुलाई को शुरू हुआ था और 3 अगस्त को रूस की सरकार ने दावा किया कि गामालेया इंस्टीट्यूट ने क्लीनिकल ट्रायल्स को पूरा कर लिया है। लेकिन, रूस की सरकार के दावों में यह स्पष्ट नहीं था कि क्या केवल दूसरा चरण पूरा हुआ है या तीनों चरण पूरे किए गए हैं?
दरअसल, रूस के दावों पर संदेह इसलिए है क्योंकि किसी भी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के दूसरे चरण में ही कुछ महीनों का समय लग जाता है, और रूस ने दूसरे चरण के चंद दिनों के बाद ही वैक्सीन के सफल और सुरक्षित होने का दावा कर दिया। अब, जबकि रूस ने वैक्सीन के मानवीय परीक्षण का तीसरा चरण WHO की गाइडलाइन्स को दरकिनार करते हुए पूरा किया ही नहीं है और वैक्सीन का अपने नागरिकों को देना शुरू कर दिया है जो कि अपने आप में काफी खतरनाक है।