...तो इस बार क्या एशिया से प्रारम्भ होगा विश्व युद्ध?
अमेरिका ने डियागो गार्सिया में तैनात किए परमाणु बमवर्षक विमान; चीन और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष की आशंका
AUG 14 (WTN) - 21वी सदी विकास की सदी है। 20 वी सदी में दो विश्व युद्धों के अलावा अन्य युद्धों और प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका झेलने के बाद हर देश अब अपने नागरिकों की उन्नति के लिए काम कर रहा है। यानि कि 21वी सदी में विकास ही हर देश का मूल मंत्र है। हालांकि, पाकिस्तान जैसा देश अभी भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश है। लेकिन इधर, वामपंथी शासन व्यवस्था वाला देश चीन विकासवाद की जगह अब भी विस्तारवाद में विश्वास करते हुए ऐसी हरकतें कर रहा है जिससे तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को बल मिल रहा है।
दरअसल, विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन का अपने हर पड़ोसी देश के साथ सीमा विवाद है। अभी हाल ही में चीन ने भारत के साथ पश्चिम लद्दाख की गलवान घाटी में सैन्य संघर्ष किया था। जिसके बाद भारत और चीन के बीच विवाद काफी बढ़ गया था। इधर, चीन, नेपाल और रूस के साथ दोस्ताना संबंध की बात तो करता है, लेकिन यही चीन, रूस और नेपाल के कुछ हिस्सों पर अपना दावा जताता है।
लेकिन, अतिक्रमण और विस्तारवाद की जो हरकतें चीन, दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर में कर रहा है उससे पूरी दुनिया में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जापान, ताइवान और फिलीपींस जैसे देशों के साथ चीन का कुछ द्वीपों को लेकर विवाद है। और इसी कारण से चीन इस इलाके में अपनी सैन्य दादागिरी दिखाने की कोशिशें करता रहता है।
इसी कड़ी में, 16 अगस्त को चीन की PLA (People's Liberation Army) और नौसेना ताइवान के लगभग 340 मील उत्तर में एक द्वीपसमूह Zhoushan पर दो दिन की लाइव-फायर ड्रिल शुरू कर रही हैं। बता दें कि पीएलए ने हाल ही में कुछ द्वीपों के पास वायुसेना युद्धाभ्यास किया था। लेकिन, पश्चिमी देशों को यह चिंता है कि चीन लगातार ये सैन्य अभ्यास दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर के बीच स्थित रणनीतिक क्षेत्रों पर ताइवान द्वारा प्रशासित तीन द्वीपों पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन, ऐसा नहीं है कि चीन की दादागिरी का विरोध नहीं हो रहा है। इधर, चीन की दक्षिण चीन सागर में बढ़ती दादागिरी पर नियंत्रण रखने के लिए अमेरिका लगातार सक्रिय है। अमेरिका ही नहीं, बल्कि जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे ताक़तवर देश भी चीन के विस्तारवाद पर लगाम लगाने के लिए पूरी कोशिशें कर रहे हैं। लेकिन, चीन को दक्षिण चीन सागर में रोकने के लिए अमेरिका पूरा ज़ोर लगा रहा है। इसी कड़ी में, अमेरिका ने एशियाई क्षेत्र में अपने नौसैनिक अड्डे डियागो गार्सिया में परमाणु बम गिराने की क्षमता से लैस तीन B-2 स्प्रिट स्टील्थ बॉम्बर विमान बमवर्षक विमानों को तैनात कर दिया है। अमेरिका के इस बड़े क़दम के बाद माना जा रहा है कि इससे चीन और अमेरिका के बीच तनाव और भी ज़्यादा बढ़ सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के इंडो पैसफिक कमान की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इन बमवर्षक विमानों की तैनाती इसलिए की गई है जिससे चीन की किसी भी हरकत का जवाब दिया जा सके। चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका का रुख कितना तगड़ा है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2016 के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने परमाणु बमवर्षक विमानों को किसी दूर के द्वीप पर तैनात किया है।
अमेरिकी रक्षा जानकारों के अनुसार, अमेरिका ने यह क़दम ताइवान के ख़िलाफ़ चीन के आक्रामक रुख के जवाब में उठाया है। अब जबकि चीन के वितारवाद को रोकने के लिए अमेरिका, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है, तो स्पष्ट है कि इससे तीसरे विश्व युद्ध की आहट मिलने लगी है। दरअसल, दक्षिण चीन सागर में यदि चीन और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है, तो यह युद्ध सिर्फ़ चीन और अमेरिका के बीच ही सीमित नहीं रहेगा। और यदि अन्य देश इस युद्ध में आमने-सामने आते हैं, तो तीसरा विश्व युद्ध तय है।