...तो क्या रूस ने नियमों को ताक पर रखकर बनाई कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-5?
रूस के डॉक्टर ने ही उठाए कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-5 की प्रमाणिकता पर सवाल
AUG 14 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) की अभी तक कोई भी ठोस, प्रामाणिक और पूरे क्लीनिकल टेस्ट पास की हुई वैक्सीन अभी तक नहीं बन पाई है। कई देशों के वैज्ञानिक COVID-19 की वैक्सीन के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं और वैक्सीन बनाने के काफी क़रीब भी आ गए हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से अभी तक क्लीनिकल ट्रायल के तीनों चरण पूरे नहीं हो सके हैं। हालांकि, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने बढ़ चढ़कर यह घोषणा की है कि रूस के वैज्ञानिकों ने COVID-19 की वैक्सीन स्पूतनिक-5 नाम से बना ली है। लेकिन, रूस द्वारा कोरोना वैक्सीन बना लेने का दावा अब लगातार विवादों में घिरता ही जा रहा है।
दरअसल, रूस के कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-5 बनाने के दावों पर WHO (World Health Organization) और कई देशों ने संदेह जताया है। इस सबके बीच, रूस के वरिष्ठ डॉक्टर ने कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया पर ऐतराज जताते हुए रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय की एथिक्स काउंसिल के अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अपने पद से इस्तीफ़ा देने वाले सांसों की बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर एलेक्जेंडर कुशलिन का कहना है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में मेडिकल एथिक्स का गम्भीर उल्लंघन किया गया है।
दरअसल, डॉक्टर एलेक्जेंडर कुशलिन ने रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-5 के बारे में कहा है कि इस वैक्सीन के राजनीतिक दबाव में न तो ठीक से ट्रायल हुए हैं और न ही किसी मेडिकल जर्नल में इस वैक्सीन से जुड़ी जानकारियां प्रकाशित की गई हैं। बता दें कि डॉक्टर एलेक्जेंडर, रूस के जाने माने डॉक्टर्स में से एक हैं और रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय की एथिक्स काउंसिल के सदस्य भी थे।
डॉक्टर एलेक्जेंडर के अनुसार, रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-5 के लिए ज़रूरी मंज़ूरी तक नहीं ली गई थीं और इसकी घोषणा जल्दबाज़ी में कर दी गई। इतना ही नहीं, डॉक्टर एलेक्जेंडर ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा है कि इस वैक्सीन के सुरक्षित होने की फ़िलहाल कोई भी गारंटी नहीं है। वहीं, डॉक्टर एलेक्जेंडर का आरोप है कि सारे नियम-क़ानून ताक पर रखकर इस वैक्सीन को मंज़ूरी देने के लिए दो डॉक्टर्स, गामालिया सेंटर फॉर एपिडेमोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर एलेक्जेंडर गिन्ट्सबर्ग और रूसी आर्मी के टॉप वायरलॉजिस्टप मेडिकल कर्नल प्रोफ़ेसर सर्गेई बोरिशेविक ने दबाव बनाया था।
इतना ही नहीं, डॉक्टर एलेक्जेंडर ने कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-5 को पुतिन सरकार के दबाव में मंज़ूरी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दरअसल, प्रोफ़ेसर एलेक्जेंडर गिन्ट्सबर्ग और प्रोफ़ेसर सर्गेई बोरिशेविक की टीम ने ही मिलकर इस वैक्सीन को तैयार भी किया है और इसे मंज़ूरी देने वाली टीम में भी यही दोनों शामिल थे। वहीं, डॉक्टर एलेक्जेंडर का गम्भीर आरोप है कि उन पर कुछ न कहने का दबाव बनाया जा रहा था, और यह दबाव उन वैज्ञानिकों ने बनाया था जिन्होंने इस वैक्सीन तैयार किया है।
इधर, आरोप है कि इन दोनों ही वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए राशियन फेडरेशन लेजिस्लेशन और इंटरनेशनल साइंटिफिक कम्युनिटी की गाइडलाइंस का पालन ही नहीं किया है। वहीं, इस वैक्सीन पर संदेह है कि इसका बारीक़ी से परीक्षण किया भी गया है कि नहीं? आरोप तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस वैक्सीन का इंसानों पर सही तरीक़े से टेस्ट ही नहीं किया गया है।
वैसे अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि डॉक्टर एलेक्जेंडर कुशलिन के दावों में कितनी सच्चाई है? हालांकि, रूस में निर्मित कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-5 का पहला टीका रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की एक बेटी को लगाया गया है जिसके आधार पर रूस की सरकार का दावा है कि स्पूतनिक-5, कोरोना वायरस की पहली सफल और सुरक्षित वैक्सीन है। ख़ैर, कौन सही है और ग़लत है? इसके लिए इंतज़ार कीजिए।