ईमानदारी और मेहनत भी नहीं बचा सकी जापान की अर्थव्यवस्था को कोरोना संकट से
साल 1980 के बाद से जापान की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट
AUG 17 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण दुनिया के कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी है। क्या अमेरिका और क्या इटली, लगभग सभी देशों की GDP, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण लगे लॉकडाउन ने काफी लोगों को बेरोज़गार कर दिया है। वहीं, नौकरी जाने से लोगों की ख़रीदी क्षमता भी कम हुई है, और इस कारण से बिक्री और उत्पादन पर असर पड़ा है और इससे हर देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई। दरअसल, हालात यह हैं कि विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश जापान, कोरोना संक्रमण संकट के कारण बुरी तरह आर्थिक मंदी का शिकार हो गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जापान की अर्थव्यवस्था को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बड़ा झटका लगा है। दरअसल, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में जापान की वार्षिक GDP में 27.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ की गई है। बता दें कि जापान में साल 1980 के बाद से GDP का डेटा उपलब्ध होने के बाद से यह सबसे बड़ी गिरावट है। ईमानदारी, कड़ी मेहनत और कर्मठता के लिए प्रसिद्ध जापान के लोगों की आर्थिक मंदी में यह हालत हो गई है कि उनके पास ख़र्च करने लायक आमदनी भी नहीं रह गई है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि छोटे से देश जापान की अर्थव्यवस्था काफी कुछ निर्यात पर निर्भर है। इसी कारण से लम्बे लॉकडाउन के बाद आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती मुश्किलों को देखते हुए जापान ने मई महीने के आख़िरी से लॉकडाउन हटाने की शुरुआत कर दी थी, और इसी के साथ ही जापान की अर्थव्यवस्था एकबार फिर से गति पकड़ने लगी थी। लेकिन, कई विश्लेषकों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था में जो भी बेहतरी होगी वो सीमित ही रहेगी क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आने के कारण ज़्यादातर लोग बहुत सोच समझकर ही ख़र्च कर रहे हैं।
दरअसल, जापान में यह लगातार तीसरी तिमाही थी जब अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गई। इधर, जापान के अर्थशास्त्र के जानकारों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में GDP में बड़ी गिरावट का कारण खपत और निर्यात में आई कमी है। लेकिन, इन लोगों को उम्मीद है कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में GDP वृद्धि दर सकारात्मक हो सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन को छोड़कर दुनिया के ज़्यादातर देशों में अर्थव्यवस्था काफी धीमी गति से पटरी पर लौट रही है। अब जबकि जापान में निजी खपत, जापान की कुल अर्थव्यवस्था का आधे से भी ज़्यादा है, तो इसमें भी इस तिमाही में 8.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ की गई है। स्पष्ट है कि लॉकडाउन के कारण लोग घरों में ही थे और उन्होंने ख़र्च भी कम किया।
हालांकि, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए जापान ने बड़े पैमाने पर राजकोषीय और मौद्रिक पैकेज जारी किया है। पर इस समय जबकि जापान की अर्थव्यवस्था पहले से ही सेल्स टैक्स में वृद्धि और अमरीका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण प्रभावित है, तो ऐसे में कोरोना संकट ने जापान की अर्थव्यवस्था को और भी बड़ा तगड़ा झटका दिया है।
इधर, जापान में पूंजीगत व्यय में 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज़ की गई है, जबकि अनुमान 4.2 प्रतिशत की गिरावट का लगाया गया था। वहीं, बाहरी मांग यानी निर्यात और आयात के बीच भी अंतर कम हुआ है, और इसी कारण से जापान की GDP में प्गिरावट दर्ज़ की गई है। ख़ैर, अब जबकि एक ईमानदार, अनुशासित और विकसित देश जापान की अर्थव्यवस्था कोरोना संकट के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी है, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि विकासशील और ग़रीब देशों की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हुआ होगा?