जानिए ताइवान के किस क़दम से बौखला गया है चीन?
Tuesday - August 18, 2020 12:53 pm ,
Category : WTN HINDI
चीन को मजबूती से टक्कर देता ताइवान
ताइवान ने चीन की दादागिरी को दिया तगड़ा जवाब
AUG 18 (WTN) - वामपंथी शासन व्यवस्था वाले देश चीन की विस्तारवादी नीतियों को सभी जानते ही हैं। चीन की सीमा से लगे देशों में शायद ही ऐसा कोई देश रहा हो जिसके साथ चीन का सीमा विवाद न रहा हो। वहीं, दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर में स्थित देशों के साथ भी चीन के द्वीपीय विवाद हैं। दरअसल, विकासवाद की 21वी सदी में भी चीन विस्तारवाद की नीति पर चल रहा है। और इसी कारण से चीन के पड़ोसी देशों के साथ तनाव इतने बढ़ गए हैं कि युद्ध तक कि नौबत आ गई है।
बात करें ताइवान की, तो चीन की नज़र इस छोटे से देश पर आधिपत्य जमाने की हमेशा से ही रही है। इसी कारण से चीन लगातार ताइवान पर कब्ज़े के प्रयास कर रहा है। दरअसल, कोरोना संकट के दौरान ही चीन ने हॉन्ग कॉन्ग पर लगभग पूरी से तरह नियंत्रण हासिल कर लिया है। ऐसे में अब चीन अपनी सैन्य शक्ति के दम पर ताइवान पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश कर सकता है। दरअसल, यह आशंका इसलिए ज़ाहिर की जा रही है क्योंकि चीन, ताइवान स्ट्रेट के पास लगातार युद्धाभ्यास कर रहा है।
लेकिन, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की तुलना में ताइवान एक छोटा देश ज़रूर है लेकिन कमज़ोर देश नहीं है। दरअसल, चीन के किसी भी सैन्य हमले का जवाब देने के लिए ताइवान ने अमेरिका के साथ F-16 फाइटर जेट की डील की है, जिसके बाद से चीन बौखला गया है। आपकी जानकारी लिए बता दें कि ताइवान और अमेरिका की हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड के बीच 62 अरब डॉलर के F-16 फाइटर जेट ख़रीदने का सौदा हुआ है। इस सौदे के तहत, ताइवान शुरू में अमेरिका से 90 फाइटर जेट खरीदेगा, जो अत्याधुनिक तकनीकों और हथियारों से लैस होंगे, और यह सौदा क़रीब 10 साल में पूरा होगा; हालांकि, ताइवान को कुछ विमान अभी मिल जाएंगे।
वैसे चीन से मुक़ाबला करने के लिए ताइवान घरेलू तौर पर ब्रेव ईगल जेट के निर्माण को भी बढ़ावा दे रहा है। जानकारी के अनुसार, इस समय ताइवान के पास क़रीब 300 लड़ाकू विमान हैं। इसमें उसके घरेलू विमान के साथ ही अमेरिकी जेट F-16 और फ्रेंच मिराज 2000 जेट भी शामिल हैं। अब स्पष्ट है कि इस अमेरिकी सौदे के साथ ही ताइवान सैन्य रूप से काफी ताक़तवर बन जाएगा।
दरअसल, चीन के पड़ोसियों को मजबूत करके अमेरिका एक तरीक़े से चीन को कमज़ोर ही बना रहा है। वहीं, दक्षिण चीन सागर में चीन की अतिक्रमण और विस्तारवाद की नीति को रोकने के लिए अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर USS रोनाल्ड रीगन को दक्षिण चीन सागर में भेजा है। इतना ही नहीं, यहां पर अमेरिकी नेवी ने जोरदार युद्धाभ्यास भी किया है।
इधर, ताइवान और अमेरिका के बीच मजबूत होते सैन्य संबंधों से चीन बौखला गया है और उसने ताइवान को तबाह तक करने की धमकी दे डाली है। बता दें कि चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चेतावनी दी है कि अगर ताइवान, अमेरिका के साथ इस इस सैन्य डील से पीछे नहीं हटता है, तो उसके फाइटर जेट मिनटों में ही ताइवान की एयरफील्ड को तबाह कर देंगे। इतना ही नहीं, चीन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी PLA (People's Liberation Army), ताइवान को सबक़ सिखाने के लिए तैयार है।
अब जबकि ताइवान और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर तनाव गहराता ही जा रहा है, तो दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। इसी कारण से चीन ने ताइवान के तट पर मरीन ब्रिगेड के तहत लगभग 40 हज़ार सैनिक तैनात किए हैं। ताइवान को अमेरिका का साथ मिलने के बाद अब चीन भी ख़ुद को सैन्य रूप से मजबूत बना रहा है क्योंकि चीन जानता है कि ताइवान पर आक्रमण करने के बाद उसे एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध लड़ना पड़ सकता है।
AUG 18 (WTN) - वामपंथी शासन व्यवस्था वाले देश चीन की विस्तारवादी नीतियों को सभी जानते ही हैं। चीन की सीमा से लगे देशों में शायद ही ऐसा कोई देश रहा हो जिसके साथ चीन का सीमा विवाद न रहा हो। वहीं, दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर में स्थित देशों के साथ भी चीन के द्वीपीय विवाद हैं। दरअसल, विकासवाद की 21वी सदी में भी चीन विस्तारवाद की नीति पर चल रहा है। और इसी कारण से चीन के पड़ोसी देशों के साथ तनाव इतने बढ़ गए हैं कि युद्ध तक कि नौबत आ गई है।
बात करें ताइवान की, तो चीन की नज़र इस छोटे से देश पर आधिपत्य जमाने की हमेशा से ही रही है। इसी कारण से चीन लगातार ताइवान पर कब्ज़े के प्रयास कर रहा है। दरअसल, कोरोना संकट के दौरान ही चीन ने हॉन्ग कॉन्ग पर लगभग पूरी से तरह नियंत्रण हासिल कर लिया है। ऐसे में अब चीन अपनी सैन्य शक्ति के दम पर ताइवान पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश कर सकता है। दरअसल, यह आशंका इसलिए ज़ाहिर की जा रही है क्योंकि चीन, ताइवान स्ट्रेट के पास लगातार युद्धाभ्यास कर रहा है।
लेकिन, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की तुलना में ताइवान एक छोटा देश ज़रूर है लेकिन कमज़ोर देश नहीं है। दरअसल, चीन के किसी भी सैन्य हमले का जवाब देने के लिए ताइवान ने अमेरिका के साथ F-16 फाइटर जेट की डील की है, जिसके बाद से चीन बौखला गया है। आपकी जानकारी लिए बता दें कि ताइवान और अमेरिका की हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड के बीच 62 अरब डॉलर के F-16 फाइटर जेट ख़रीदने का सौदा हुआ है। इस सौदे के तहत, ताइवान शुरू में अमेरिका से 90 फाइटर जेट खरीदेगा, जो अत्याधुनिक तकनीकों और हथियारों से लैस होंगे, और यह सौदा क़रीब 10 साल में पूरा होगा; हालांकि, ताइवान को कुछ विमान अभी मिल जाएंगे।
वैसे चीन से मुक़ाबला करने के लिए ताइवान घरेलू तौर पर ब्रेव ईगल जेट के निर्माण को भी बढ़ावा दे रहा है। जानकारी के अनुसार, इस समय ताइवान के पास क़रीब 300 लड़ाकू विमान हैं। इसमें उसके घरेलू विमान के साथ ही अमेरिकी जेट F-16 और फ्रेंच मिराज 2000 जेट भी शामिल हैं। अब स्पष्ट है कि इस अमेरिकी सौदे के साथ ही ताइवान सैन्य रूप से काफी ताक़तवर बन जाएगा।
दरअसल, चीन के पड़ोसियों को मजबूत करके अमेरिका एक तरीक़े से चीन को कमज़ोर ही बना रहा है। वहीं, दक्षिण चीन सागर में चीन की अतिक्रमण और विस्तारवाद की नीति को रोकने के लिए अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर USS रोनाल्ड रीगन को दक्षिण चीन सागर में भेजा है। इतना ही नहीं, यहां पर अमेरिकी नेवी ने जोरदार युद्धाभ्यास भी किया है।
इधर, ताइवान और अमेरिका के बीच मजबूत होते सैन्य संबंधों से चीन बौखला गया है और उसने ताइवान को तबाह तक करने की धमकी दे डाली है। बता दें कि चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चेतावनी दी है कि अगर ताइवान, अमेरिका के साथ इस इस सैन्य डील से पीछे नहीं हटता है, तो उसके फाइटर जेट मिनटों में ही ताइवान की एयरफील्ड को तबाह कर देंगे। इतना ही नहीं, चीन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी PLA (People's Liberation Army), ताइवान को सबक़ सिखाने के लिए तैयार है।
अब जबकि ताइवान और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर तनाव गहराता ही जा रहा है, तो दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका गहराती जा रही है। इसी कारण से चीन ने ताइवान के तट पर मरीन ब्रिगेड के तहत लगभग 40 हज़ार सैनिक तैनात किए हैं। ताइवान को अमेरिका का साथ मिलने के बाद अब चीन भी ख़ुद को सैन्य रूप से मजबूत बना रहा है क्योंकि चीन जानता है कि ताइवान पर आक्रमण करने के बाद उसे एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध लड़ना पड़ सकता है।