COVID-19 के सामने अब न्यूज़ीलैंड मॉडल भी हुआ असफल; तो क्या बिना वैक्सीन इस बीमारी पर नियंत्रण है असम्भव?
COVID-19 के नए मामले आने के बाद न्यूज़ीलैंड के सामने आम चुनाव कराने की चुनौती
AUG 18 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इस समय मानव सभ्यता के अस्तित्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की भयावहता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 7,77,751 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, जैसा कि आप जानते ही हैं कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी ऐसी प्रामाणिक वैक्सीन नहीं बन पाई है जो कि क्लीनिकल ट्रायल के सभी चरणों को पूरा कर चुकी हो। हालांकि, रूस का दावा है कि उसने कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की पहली सफल और सुरक्षित वैक्सीन बना ली है। लेकिन, रूस के इस दावे पर न तो WHO और न ही अमेरिका समेत अन्य देश विश्वास कर रहे हैं।
ख़ैर, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। यहां तक कि अब न्यूज़ीलैंड में भी एक बार फिर से कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद से हड़कम्प मच गया है। इसी कारण से न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद आम चुनावों को फिलहाल एक महीने के लिए टाल दिया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शुरुआत में न्यूजीलैंड में कोरोना वायरस संक्रमण के काफी मामले आए थे। लेकिन, न्यूज़ीलैंड की सरकार ने वहां के नागरिकों के सहयोग से इस बीमारी पर तुरन्त ही नियंत्रण हासिल कर लिया था जिसकी पूरी दुनिया में तारीफ हुई थी। लेकिन, न्यूज़ीलैंड में 100 दिनों तक कोरोना वायरस संक्रमण का कोई भी नया मामला सामने नहीं आने के बाद, अब ऑकलैंड के एक इलाक़े में कोरोना वायरस संक्रमण के 49 नए मामले सामने के बाद से न्यूज़ीलैंड में हड़कम्प मच गया है। हालांकि, संक्रमण और न फैले इसके लिए प्रभावित क्षेत्र में कड़ा लॉकडाउन लगाया गया है, और स्थिति पर जल्द नियंत्रण पाने की कोशिशें चल रही हैं। बता दें कि न्यूज़ीलैंड में कोरोना वायरस संक्रमण के अब कुल 90 एक्टिव केस सामने आ चुके हैं।
दरअसल, न्यूज़ीलैंड में अगले महीने 19 सितंबर को आम चुनाव होने हैं। लेकिन, अब जबकि ऑकलैंड के एक इलाक़े में कोरोना वायरस संक्रमण के 49 नए मामले सामने आए हैं, तो अब आम चुनाव को चार सप्ताह के लिए टाल दिया गया है। जानकारी के अनुसार, अब न्यूज़ीलैंड में आम चुनाव 17 अक्टूबर को होंगे। दरअसल, न्यूज़ीलैंड के सामने सबसे बड़ी चुनौती 25 हज़ार चुनाव कर्मियों को कोरोना वायरस संक्रमण से सुरक्षित रखने की होगी।
हालांकि, न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री का कहना है कि आम चुनाव की तारीख़ को आगे बढ़ाने का निर्णय लेते समय उन्होंने मतदान में मतदाताओं की भागीदारी और पारदर्शिता का ध्यान रखा है। लेकिन, इतना तय है कि न्यूज़ीलैंड में आम चुनाव की तारीख़ को और आगे नहीं बढ़ाया जाएगा क्योंकि न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण अब कुछ और समय के लिए ही उनके साथ रहेगा, और चुनाव की तारीख़ को आगे बढ़ाते रहने से कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा कम नहीं होगा। दरअसल, न्यूज़ीलैंड में चुनाव आयोग ने ऐसी तैयारियां की हैं कि यदि देश में कोरोना वायरस संक्रमण महामारी नियंत्रित रूप से फैलती भी रही, तो भी चुनाव के लिए मतदान करा लिया जाए।
अब जबकि न्यूज़ीलैंड में 100 दिन तक कोरोना वायरस संक्रमण का कोई भी मामला सामने न आने के बाद अचानक 90 एक्टिव केस सामने आए हैं, तो इससे साफ होता है कि जब तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन नहीं बन जाती है, तब तक इस महामारी से निजात पाना लगभग असम्भव ही है।