नेपाल की ज़मीन पर चीन की 'नज़र', लेकिन भारत विरोधी एजेंडे में मशगूल प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली
नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की भारत विरोधी छवि बनी उनकी मुसीबत
AUG 19 (WTN) - कहते हैं कि जो शासक, इतिहास के उदाहरण से सीख लेता है वो सबसे ज़्यादा समझदार शासक होता है। लेकिन, लगता है कि भारत के पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली इतिहास के उदाहरण से सबक़ नहीं लेने वाले एक ज़िद्दी राजनेता हैं। दरअसल, जैसा कि आप जानते ही हैं कि चीन ने भारत के साथ मित्रता का नाटक किया था और 1962 में भारत पर हमला कर भारत की सामरिक महत्व की काफी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया था। पूरी दुनिया में आज भी चीन की इस धोखेबाज़ी को लोग उदाहरण के तौर पर याद रखते हैं।
लेकिन इधर, नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली, चीन की दोस्ती पर आंखों पर पट्टी बांधकर उस पर विश्वास कर रहे हैं। और, आरोप है कि इधर चीन, नेपाल की ज़मीन पर कब्ज़ा करता जा रहा है। दरअसल, कुछ दिनों पहले कई ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि चीन ने नेपाल की कुछ ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है। इसी कारण से इसको लेकर नेपाल में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से लोग सवाल कर रहे हैं, लेकिन चीन के प्रति अपने झुकाव के कारण प्रधानमंत्री ओली चुप्पी साधे बैठे हैं।
दरअसल, नेपाल की ज़मीन पर चीन द्वारा कब्ज़ा करने का मुद्दा तब एक बड़ा मुद्दा बन गया जब नेपाली ज़मीन पर चीन का कब्ज़ा होने की रिपोर्ट देने वाले नेपाली पत्रकार, कांतिपुर डेली के असिस्टेंट एडिटर बलराम बनिया की संदिग्ध मौत हो गई। बलराम बनिया की संदिग्ध मौत के बाद नेपाल के पत्रकार संगठन इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, इधर, पाकिस्तान में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ हिन्दू बाहुल्य नेपाल में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में इस मामले का भी प्रधानमंत्री ओली पर चौतरफा दबाव है।
इस सबके बीच, अपने देश में भारी दबाव झेल रहे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से टेलीफ़ोन पर बात की है। माना जा रहा कि भारत को नाराज़ और दरकिनार करने और चीन की तरफ़ झुकने के आरोप लगने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चर्चा कर ख़ुद को तटस्थ दिखाने की, और अपने देश के नागरिकों का गुस्सा शांत करने की कोशिश की है।
हालांकि, नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से टेलीफ़ोन पर चर्चा कर यह दिखाने की कोशिश की है कि नेपाल और भारत के बीच सब कुछ सामान्य है, और दोनों देशों के बीच कुछ भी नाराज़गी और विवाद नहीं है। लेकिन, हाल के समय में चीन की राजदूत के ज़रिए नेपाल के शासन, प्रशासन और राजनीति में चीन की दखलंदाज़ी से स्पष्ट है कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली, चीन के इशारों पर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उधर चीन, नेपाल की ज़मीन पर कब्ज़ा करता जा रहा है। अब देखना होगी कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली अपनी जनता के सवालों के जवाब देते हैं कि नहीं।