जानिए क्यों संकट में घिरते जा रहे हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग?
...तो क्या चीन में शी जिनपिंग के ख़िलाफ़ हो सकता है विद्रोह?
AUG 20 (WTN) - चीन हमेशा से ही एक रहस्यमयी देश रहा है। चीन के अंदर क्या होता है और क्या नहीं होता है? इसके बारे में अन्य देशों को जानकारी हासिल नहीं हो पाती है। दरअसल, ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन की वामपंथी शासन व्यवस्था वाली सरकार ने पूरे देश में कठोर सेन्सरशिप लगाकर रखी है। यानि कि चीन में स्वतंत्र मीडिया का कोई अस्तित्व नहीं है। और जो भी मीडिया है, वो चीन की वामपंथी सरकार के नियंत्रण में है।
अब जबकि चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से पूरी दुनिया परेशान है, ऐसे में सभी देश, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से सवाल कर रहे हैं कि इस महामारी को पहचानने और रोकने में आख़िर क्यों चीन की वामपंथी सरकार ने ग़लती की, लापरवाही दिखाई और ग़ैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार किया? स्वाभाविक है कि इस समय शी जिनपिंग का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है। लेकिन, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि चीन के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति शी जिनपिंग को अब अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, चीन में कम्युनिस्ट शासन में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वैसे तो कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख होने के कारण चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस समय चीन के सबसे ताक़तवर व्यक्ति हैं, और कम्युनिस्ट पार्टी में उनका पूरी तरह वर्चस्व और नियंत्रण है। लेकिन, अब हालात बदल गए हैं। दरअसल, अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में ही सभी लोग शी जिनपिंग के साथ नहीं दिख रहे हैं, बल्कि उनका और उनकी नीतियों का विरोध करने लगे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह दावा किया है चीन के प्रतिष्ठित सेंट्रल पार्टी स्कूल की एक पूर्व प्रोफेसर काई जिया ने। प्रसिद्ध समाचार पत्र गार्जियन में प्रकाशित एक ख़बर के अनुसार, "चीन के प्रमुख नेता शी जिनपिंग पर उनके ही देश के कई लोगों ने चीन को मार देने का आरोप लगाया है।" समाचार पत्र गार्जियन ने काई जिया के हवाले से दावा किया है कि चीन के बहुत से लोग शी जिनपिंग को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर देखना चाहते हैं।
दरअसल, प्रोफेसर काई जिया चीन के शीर्ष अधिकारियों को उच्च शिक्षा संस्थान में पढ़ाया करती थीं। लेकिन, शी जिनपिंग की आलोचना करने के आरोप में उन्हें हाल ही में पार्टी से निष्कासित कर दिया है। किसी भी तरह के विरोध से डरने वाली चीन की वामपंथी सरकार ने स्कूल के द्वारा काई को दिए अपने नोटिस में कहा है कि काई की टिप्पणियां देश की छवि को ख़राब करने वाली और गम्भीर राजनैतिक समस्याओं से भरी थीं।
दरअसल, काई जिया समेत चीन के कई लोगों का आरोप है कि शी जिनपिंग के शासनकाल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में चीन के विकास की ताक़त नहीं रह गई है। इतना ही नहीं, जिनपिंग के विरोधियों का इतना तक कहना है कि जिनपिंग चीन के विकास में बाधक बन गए हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग कम्युनिस्ट पार्टी छोड़ना चाहते हैं।
दरअसल, प्रोफेसर काई जिया द्वारा जिनपिंग पर लगाए गए आरोपों और दावों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। दरअसल, काई जिया कोई सामान्य प्रोफेसर नहीं हैं, बल्कि वे चीन के उस सेंट्रल पार्टी स्कूल में पढ़ा चुकि हैं जहां ख़ुद माओ, जेनडोंग, हु जिंताओ और शी जिनपिन जैसे चीन के प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टी नेता पढ़ाई कर चुके हैं। इस दृष्टिकोण से काई जिया के आरोपों और दावों को कम्युनिस्ट पार्टी और शी जिनपिंग को एक चुनौती मानना चाहिए।
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को सही तरीके से हैंडल नहीं करने के आरोप जिनपिंग पर ख़ुद उनके ही देश के लोग लगा रहे हैं। चीन के कुछ लोगों का मानना है कि शी जिनपिंग ने चीन को दुनिया का दुश्मन बना दिया है। वहीं, चीन के कुछ लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस के कारण अन्य देश चीन को दुश्मन और आरोपी की दृष्टि से देखने लगे हैं।
इधर, ख़बर है कि कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर ही शी जिनपिंग का विरोध तेज़ होता जा रहा है। लेकिन, केवल पार्टी के कुछ ही लोग अभी खुले तौर पर जिनपिंग का विरोध कर पा रहे हैं। वहीं, बाक़ी लोग चुप इसलिए हैं क्योंकि उन्हें पार्टी के अंदरूनी अनुशासन और भ्रष्टाचार के आरोपों का डर है। ख़ैर, अब देखना होगा कि पार्टी में अपने ख़िलाफ़ उठने वाली आवाज़ों और हो रहे विरोध का शी जिनपिंग कब तक और क्या जवाब देते हैं? या फ़िर इन आवाज़ों और विरोध को देशद्रोह कहकर कुचल दिया जाता है।