किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग की सक्रियता से बढ़ी अटकलें
उत्तर कोरिया में फिर से शक्तिशाली होती किम यो-जोंग
AUG 21 (WTN) – यदि दुनिया में कोई शासक सबसे ज़्यादा सुर्खियों में रहता है, तो वह हैं उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक किम जोंग-उन। किम जोंग क्या करते हैं और क्या नहीं करते हैं? यह हमेशा से ही पूरी दुनिया में चर्चा का विषय रहता है। वैसे तो उत्तर कोरिया एक ऐसा देश है जहां कहां हो रहा है इसकी जानकारी अन्य देशों को पता नहीं चल पाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि उत्तर कोरिया के तानाशाह शासकों ने अपने देश को अन्य देशों के सम्पर्क से दूर रखा है। ख़ैर, इस देश में कुछ भी हो, कभी ना कभी तो इसकी जानकारी अन्य देशों को हासिल हो ही जाती है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कुछ समय पहले उत्तर कोरिया से यह ख़बर सामने आई थी कि किम जोंग-उन की तबीयत ठीक नहीं है। वहीं, कहा तो यह भी जा रहा था कि किम जोंग-उन की मौत हो गई है। लेकिन, दुनिया के सामने आकर किम जोंग-उन ने बता दिया के वे अभी ज़िंदा हैं। ख़ैर, लेकिन अब उत्तर कोरिया से एक नई ख़बर सामने आई है। दरअसल, दक्षिण कोरिया की जासूस एजेंसियों ने दावा किया है कि किम जोंग-उन ने अपनी बहन किम यो-जोंग को हाल ही में कई अहम ज़िम्मेदारियां सौंपी हैं। यदि दक्षिण कोरिया की जासूस एजेंसियों का यह दावा सही है, तो कहा जा सकता है कि एक बार फ़िर से किम यो-जोंग उत्तर कोरिया में शक्तिशाली होती जा रही है।
हालांकि, यह सच है कि किम जोंग-उन ने काफ़ी शक्तियां अपनी बहन किम यो-जोंग को दे दी हैं, लेकिन अभी भी उत्तर कोरिया में पूरी तानाशाही ताक़त किम जोंग-उन के पास ही है। लेकिन, अपने ऊपर दबाव घटाने के लिए किम जोंग-उन ने अपनी काफ़ी अहम जिम्मेदारियों को अपनी छोटी बहन किम यो-जोंग को सौंप दिया है, और इसका ऐलान बाक़ायदा नेशनल असेम्बली में भी हो चुका है। नेशनल असेम्बली में इसका ऐलान होने के बाद से किम यो-जोंग आधिकारिक तौर पर उत्तर कोरिया की अंतरराष्ट्रीय नीति देखेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किम यो-जोंग अपने भाई किम जोंग-उन से चार साल छोटी हैं। जहां तक किम यो-जोंग की पढ़ाई की बात है, तो किम यो ने सीनियर सेकंडरी की पढ़ाई उत्तर कोरिया में ही की है, लेकिन आगे की पढ़ाई उन्होंने स्विट्ज़रलैंड के बर्न में साल 2000 तक की। कहा जाता है कि इस दौरान वे वहां पर नाम बदलकर रहा करती थीं। किम यो-जोंग को पहली बार साल 2010 में अपने पिता के साथ वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया के कन्वेंशन में देखा गया था। इसके क़रीब तीन साल बाद वे अपने पिता के अंतिम संस्कार के मौक़े पर पब्लिक के सामने नज़र आई थीं। लेकिन, किम यो-जोंग की राजनैतिक सक्रियता साल 2014 से ही शुरू हुई है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किम यो-जोंग उत्तर कोरिया की स्थानीय भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी और जर्मन भाषा भी अच्छी तरह से बोल लेती हैं। किम यो-जोंग ने अपनी ही पार्टी के सेक्रेटरी चोए योंग-हे के बेटे से शादी की थी, जिसकी लगभग 5 साल पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई है।
दरअसल, किम यो-जोंग की उत्तर कोरिया की सक्रिय राजनीति में यह दूसरी पारी है। बता दें कि हाल ही में किम यो-जोंग को उत्तर कोरिया में निर्णय लेने वाले सबसे बड़े संगठन Politburo का वैकल्पिक सदस्य बनाया गया है। वैसे किम यो-जोंग को इस पद से पिछले साल अप्रैल में हटा दिया गया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि हनोई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ किम जोंग-उन की वार्ता विफल हो गई थी, और इसी की सज़ा के तौर पर किम यो-जोंग को इस पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
लेकिन, अब माना जा रहा है कि किम जोंग-उन की तबीयत कथित रूप से ख़राब होने के बाद उत्तर कोरिया की कमान सम्भालने की ज़िम्मेदारी उनकी बहन किम यो-जोंग को मिल सकती है। वैसे किम यो-जोंग जब से उत्तर कोरिया की राजनीति में सक्रिय हुई हैं, तभी से वे अपने भाई किम जोंग-उन की राजनैतिक सलाहकार होने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा में भी अहम ज़िम्मेदारी सम्भालती रही हैं।
माना जाता है किम यो-जोंग की दो कार्यालयों Offices 38 and 39 में ख़ासी दख़लंदाज़ी है, जहां सही या ग़लत कामों से परिवार और देश के लिए भारी मात्रा में कैश जमा होता है। कहा जाता है कि यह पैसा साइबरथेफ्ट और तस्करी जैसे कामों से एकत्रित किया जाता है। फ़िलहाल, किम यो-जोंग, Propaganda and Agitation Department की पहली वाइस डायरेक्टर हैं। दरअसल, किम जोंग-उन की देश के अन्दर और विदेशों में सार्वजनिक छवि बनाने के पीछे उनकी छोटी बहन किम यो-जोंग का ही दिमाग़ और योजना है। इतना ही नहीं, किम यो-जोंग उत्तर कोरिया आर्मी की महिला-यूनिट को भी संभालती हैं।
ख़ैर, अब जबकि किम जोंग-उन की तबीयत ठीक नहीं होने और उन्हें कोई गम्भीर बीमारी होने की अटकलों के बीच किम यो-जोंग, उत्तर कोरिया की राजनीति में काफ़ी सक्रियता दिखा रही हैं। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर कोरिया की इस तानाशाह फैमेली में बेटे को ही सत्ता सौंपी जाती रही है। लेकिन, किम जोंग-उन का बड़ा बेटा अभी अवयस्क है, तो ऐसे में हो सकता है कि उसके अव्यस्क होने तक किम यो-जोंग ही उत्तर कोरिया की राजनीति में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च सत्ता बना जाएं, या फ़िर किम जोंग-उन के निधन के बाद किम यो-जोंग ही सत्ता पर ख़ुद काबिज़ हो जाएं।