तो क्या साउथ चाइना सी से शुरू होगा अगला विश्व युद्ध?
साउथ चाइना सी में चीन की हरक़तों से विश्व युद्ध का ख़तरा
AUG 26 (WTN) - चीन एक ऐसा देश है जिससे दुनिया का लगभग हर देश परेशान है। चीन के पड़ोसी देश तो चीन की विस्तारवादी नीतियों के कारण परेशान हैं ही। वहीं, चीन द्वारा घटिया माल की सप्लाई के कारण दुनिया के अन्य देश भी उससे परेशान रहते हैं। लेकिन, चीन की दादागिरी अब बढ़ती ही जा रही है। यदि चीन की विस्तारवाद की नीतियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में चीन की अतिक्रमण की हरकतों से तीसरे विश्व युद्ध की आशंका है।
दरअसल, चीन काफी समय से साउथ चाइना सी पर अपना आधिपत्य जमाने की कोशिश कर रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें चीन, साउथ चाइना सी पर अपना आधिपत्य जमाने की सारी कोशिशें इसलिए कर रहा है, क्योंकि एक तो यह इलाका सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। वहीं, इस इलाके में कच्चे तेल और नेचुरल गैसों का विशाल भण्डार है। लगभग 35 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस समुद्र में बहुतायत में मूंगे और समुद्री जीव-जंतु पाए जाते हैं। इतना ही नहीं, दुनियाभर में होने वाले मछली व्यापार की लगभग आधी आपूर्ति यहीं से होती है।
दरअसल, चीन ने साउथ चाइना सी पर अपना कब्ज़ा जमाने के लिए कई देशों को परेशान किया हुआ है। यहां तक की वामपंथी शासन व्यवस्था वाले देश वियतनाम तक को चीन धमकाता रहता है। इतना ही नहीं, चीन ने तो वियतनाम को धमकाते हुए सामरिक महत्व के पार्सल आइलैंड में H-6J बमवर्षक विमान तक तैनात कर दिए हैं। दरअसल, पार्सल आइलैंड, साउथ चाइना सी का वही हिस्सा है जिस पर चीन अपना दावा पेश करता है। लेकिन, वितयनाम का दावा है कि इस द्वीप पर उसका अधिकार है। चीन की दादागिरी साउथ चाइना सी में इतनी ज़्यादा बढ़ती जा रही है कि चीन न केवल पार्सल आइलैंड पर कब्ज़ा करना चाहता है, बल्कि चीन, साउथ चाइना सी के 80 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्से पर ख़ुद का अधिकार जताता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विवादित साउथ चाइना सी का उत्त्तरी हिस्सा चीन के मेनलैंड को छूता है। वहीं, समुद्र के दक्षिण-पूर्वी भाग पर ताइवान अपनी दावेदारी रखता है, तो सागर का पश्चिमी तट, वियतनाम और कंबोडिया से लगा हुआ है। इधर, समुद्र का पूर्वी तट, फिलीपींस से लगा हुआ है। वहीं, समुद्र के दक्षिणी क्षेत्र में इंडोनेशिया के द्वीप हैं। आर्थिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्र के कई हिस्सों पर चीन, ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई और मलेशिया अपना-अपना अधिकार जताते रहे हैं। लेकिन, चीन इस समुद्र के 80 प्रतिशत हिस्से पर अधिकार जताता है।
आर्थिक और सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण साउथ चाइना सी पर कब्ज़ा जमाने के लिए चीन ने काफी पहले से ही रणनीति के तहत काम करना शुरु कर दिया था। बता दें कि समुद्र में खोदाई करने वाले चीनी जहाजों ने एक समुद्री पट्टी पर निर्माण शुरू करने के बाद और बाकायदा एक बंदरगाह और हवाई पट्टी भी तैयार कर ली है। इतना ही नहीं, चीन ने इस समुद्र में कई अप्राकृतिक द्वीप भी बना लिए हैं, जिसमें मिलिट्री बेस और जंगी जहाज भी तैनात हैं। दरअसल, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस समुद्र में चीन ने युद्ध की काफी बड़ी तैयारी की हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यदि ताइवान या वियतनाम के साथ चीन का कभी युद्ध हो और युद्ध में अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसी शक्तियां शिरकत करती हैं, तो चीन बीच समुद्र में ही इन देशों को रोक सके, और चीन की मुख्य भूमि तक युद्ध की नौबत ही ना आ सके।