तमाम आशंकाओं को दरकिनार कर जल्द ही गति पकड़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था
कोरोना संकट के झटके से धीरे-धीरे उबर रही भारत की GDP
AUG 26 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना संकट के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट देखी जा रही है। यहां तक कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका तक कोरोना वायरस संकट से अछूती नहीं रही है। दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण उद्योगों और सर्विस सेक्टर में भारी मंदी और गिरावट देखी गई, और इसी कारण से तमाम अर्थव्यवस्थाओं को झटका लगा है।
ख़ैर, जहां तक भारत की बात है, तो कोरोना संकट ने भारत की अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। उद्योगों और ऑफिसों के बंद होने से जहां एक तरह लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ मांग, कम और कमज़ोर होने से अर्थव्यवस्था पटरी से उतार गई। लेकिन, भारतीय अर्थव्यवस्था को लगे तमाम झटकों के बाद भी, रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अनुमान जताया है कि इस साल की दूसरी छमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मूडीज़ इनवेस्टर्स सर्विस ने अनुमान जताया है कि जी-20 के देशों, भारत, चीन और इंडोनेशिया की GDP साल 2020 की दूसरी छमाही में गति पकड़ लेगी। हालांकि, मूडीज़ अभी भी इस अनुमान पर कायम है कि साल 2020 के दौरान भारत की GDP में क़रीब 3.1 प्रतिशत की गिरावट आएगी।
दरअसल, मूडीज़ ने अपने अगस्त के अपडेटेड ग्लोबल मैक्रो आउटलुक 2020-21 में कहा है, "विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों में आर्थिक परिस्थितियां तुलनात्मक रूप से ज़्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। लेकिन, हमारा अनुमान है कि जी-20 के देश, भारत, चीन और इंडानेशिया ही ऐसे देश होंगे, जहां साल 2020 की दूसरी छमाही में GDP पर्याप्त गति पकड़ लेगी, और इन देशों की अर्थव्यवस्था साल 2021 में कोरोना संकट से पहले वाले दौर में पहुंच जाएगी।"
वहीं, मूडीज़ ने यह अनुमान लगाया है कि साल 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। हालांकि, कोरोना संकट से पहले की बात करें, तो तब अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण आई वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत कोई बहुत अच्छी नहीं थी। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान भारत की GDP ग्रोथ रेट सिर्फ 4.2 प्रतिशत थी, जो कि पिछले 11 साल की सबसे कम GDP ग्रोथ रेट थी।
हालांकि, कोरोना संकट के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट और आर्थिक मंदी की जो आशंका व्यक्त की जा रही थी वैसी स्थिति अभी तक भारतीय अर्थव्यवस्था की नहीं हो पाई है। बता दें कि RBI (Reserve Bank of India) यानि भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमान रहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश की GDP ग्रोथ रेट में गिरावट आएगी।
वहीं, तमाम रेटिंग एजेंसियों ने यह आशंका जताई थी कि कोरोना संकट के कारण पैदा हुए हालातों के कारण भारत की GDP में में 3 से 9 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी। इधर, रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने अनुमान लगाया था कि कोरोना के कारण वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की GDP में 5 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी। वहीं दूसरी तरफ रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी थी कि भारत में आज़ादी के बाद की सबसे भयानक मंदी आने वाली है।
ख़ैर, जहां तक वर्तमान समय की बात है, तो देश में अनलॉक की स्थिति के बाद अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे गति पकड़ती जा रही है क्योंकि उद्योगों और ऑफिसों में सामान्य दिनों की तरह काम होने लगे हैं। हालंकि, कोरोना वायरस के केस लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, लेकिन फिर भी आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी देखी जा रही है। ख़ैर, अब जब चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजे आएंगे, तो ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना संकट से ख़ुद को कितना सम्भल पाई है।