CPEC की आड़ में चीन और पाकिस्तान की 'विध्वंसकारी' प्लानिंग
ऑस्ट्रेलिया की एक वेबसाइट का दावा: चीन और पाकिस्तान मिलकर बना रहे हैं जैविक हथियार
AUG 27 (WTN) - चीन, भारत का एक ऐसा पड़ोसी देश है जो लगातार भारत के ख़िलाफ़ षडयंत्र में लगा रहता है और चीन इसके लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाता रहता है। वहीं, कभी-कभी ख़ुद चीन भी भारत के ख़िलाफ़ षडयंत्र में पाकिस्तान का मोहरा बन जाता है। लेकिन, इन दोनों ही देशों का एक ही उद्देश्य और लक्ष्य होता है कि किसी भी तरह से भारत को नुकसान पहुंचाया जाए।
ख़ैर, वैसे तो समय-समय पर भारत के ख़िलाफ़ चीन-पाकिस्तान गठजोड़ की ख़बरें सामने आती रहती हैं। लेकिन, अब इन दोनों देशों की एक नापाक हरकत के ख़ुलासे से पूरी दुनिया आशंकित हो चुकी है। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया की एक न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन के एंथनी क्लान ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि CEPC (China Pakistan Economic Corridor) की आड़ में चीन और पाकिस्तान दोनों देश मिलकर पिछले कुछ सालों से जैविक हथियार बनाने का काम कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन ने दावा किया है कि जैविक हथियार बनाने में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी भी शामिल है, जो कि कोरोना वायरस के लिए पूरी दुनिया में बदनाम है। न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन के अनुसार, वुहान की वॉयरोलॉजी लैब को इस पूरे प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एंथनी क्लान की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी के वैज्ञानिक, पाकिस्तान में साल 2015 से ही खतरनाक वायरस पर रिसर्च कर रहे हैं, और यह रिसर्च ख़ासतौर पर वायरस को जैविक हथियार में बदलने से संबंधित है।
दरअसल, न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि CPEC के तहत चीन और पाकिस्तान के बीच जो डील हुई है उसके एक हिस्से को सीक्रेट रखा गया है क्योंकि यह हिस्सा जैविक हथियारों से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट का दावा है कि इस तीन साल की सीक्रेट डील में चीन और पाकिस्तान, जैविक हथियारों की क्षमता को बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
चीन और पाकिस्तान के इरादे कितने ख़तरनाक हैं इसका अंदाज़ा आप इससे लगा सकते हैं कि दोनों देश मिलकर वेस्ट नील वायरस, मर्स-कोरोनावायरस, क्रीमिया-कॉन्गो हेमोरजिक फीवर वायरस, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस और चिकनगुनिया को जैविक हथियार में बदलने पर काफी समय से काम कर रहे हैं। न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन के अनुसार, रिसर्च के नाम पर पाकिस्तान में हज़ारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का ब्लड सैम्पल लिए गए हैं, और इनमें ज़्यादातर वे लोग लोग शामिल थे जो जानवरों के साथ काम करते थे।
एंथनी क्लान ने न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन की अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि दोनों देशों (चीन और पाकिस्तान) के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त स्टडी बाकायदा एक मेडिकल जर्नल में भी छप चुकी है, जिसमें जैविक हथियार के रूप में खतरनाक वायरस का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार, जैविक हथियारों पर यह रिसर्च दिसम्बर 2017 से लेकर इस साल मार्च तक की गई थी।
एंथनी क्लान के अनुसार, इस रिसर्च में जूनोटिक पैथाजंस यानि जानवरों से इंसानों में आने वाले वायरस की पहचान और लक्षणों के बारे में बताया गया है। इतना ही नहीं, इस रिसर्च में पाकिस्तान ने वुहान इंस्टीट्यूट को वायरस संक्रमित सेल्स उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद भी कहा है। वहीं, इसके साथ ही रिसर्च को CPEC के तहत मिले सहयोग का भी उल्लेख किया गया है।
न्यूज़ वेबसाइट क्लाक्सोन की रिपोर्ट से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि चीन और पाकिस्तान के इरादे कितने विध्वंसकारी हैं। दरअसल, चीन और पाकिस्तान के बीच जो समझौता किया गया है इसके तहत दोनों देश संक्रामक बीमारियों पर शोध कर रहे हैं। लेकिन, आरोप है कि दोनों देश मिलकर इस समझौते की आड़ में जैविक हथियारों के लिए रिसर्च कर रहे हैं। ख़ैर, चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ कितना ख़तरनाक है इसके बारे में अब दुनिया को पता चलता जा रहा है। लेकिन, यदि समय रहते चीन और पाकिस्तान को जैविक हथियार बनाने से नहीं रोका गया, तो इसकी बहुत बड़ी क़ीमत भारत और दुनिया को चुकाना पड़ेगी।