जानिए किस कारण से लोग दोबारा हो रहे हैं कोरोना वायरस से संक्रमित?
सावधान! हल्के में ना लें कोरोना वायरस संक्रमण महामारी को
AUG 28 (WTN) - यदि आप अभी भी कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) को एक सामान्य फ्लू समझ रहे हैं और उसे हल्के में ले रहे हैं, तो आप बहुत बड़ी ग़लती कर रहे हैं। जी हां, दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से संक्रमित होने के बाद मृत्यु दर बेहद ज़रूर कम है, और रिकवरी रेट बहुत ज़्यादा। लेकिन, जहां एक तरफ़ कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित होने पर प्रभावित व्यक्ति के शरीर के कई अंगों को कोरोना वायरस प्रभावित करता है, तो वहीं दूसरी तरफ़ कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद फिर से संक्रमित होने की काफी ज़्यादा आशंका है।
दरअसल, कई देशों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद लोग फिर से कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। इससे साफ है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद लोगों के शरीर में एंटीबॉडी ज़्यादा दिनों तक नहीं रह पाती है और लोग दोबारा संक्रमित हो रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी वायरस जनित बीमारी से बचे रहने के लिए उस बीमारी की एंटीबॉडी का शरीर में होना काफी ज़रुरी है। क्योंकि जब तक शरीर में एंटीबॉडी रहेगी तब तक वायरस के आक्रमण से बचे रहने की काफी ज़्यादा सम्भावना रहती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस और उसकी एंटीबॉडी को लेकर ललगातार रिसर्च जारी हैं। इसी कड़ी में एक नए रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की एंटीबॉडी 50 दिनों के बाद शरीर से ख़त्म हो जाती है। हालांकि, पहले किए गए कुछ रिसर्च में दावे किए जाते रहे हैं कि कोरोना वायरस की एंटीबॉडी तीन महीनों तक शरीर में बनी रहती है।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई के जेजे हॉस्पिटल में एक रिसर्च किया गया। इस रिसर्च में उन 801 लोगों को शामिल किया गया जो कोरोना वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो गए थे। इन 801 लोगों में से 28 लोगों के RT-PCR टेस्ट सेरो सर्वे के तहत किए गए। लेकिन, इनमें से किसी में भी एंटीबॉडी नहीं दिखी।
रिसर्च के तहत मुंबई के जेजे हॉस्पिटल में 34 ऐसे लोगों के भी टेस्ट किए गए जो 3 से 5 हफ्ते पहले कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। रिसर्च के अनुसार, इनमें से 90 प्रतिशत लोगों में पाया गया कि पांचवें हफ्ते में इनके शरीर में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 38.8 प्रतिशत ही एंटीबॉडी बची थी।
वहीं, इससे पहले न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में एंटीबॉडीज़ की स्टडी पर प्रकाशित एक रिसर्च में बताया गया था कि कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के क़रीब 37 दिन बाद पहले नमूने लिये गए। वहीं, और दूसरे नमूने क़रीब 86 दिनों के भीतर लिये गए। इस शोध के बाद शोधकर्ताओं का दावा है कि इन लोगों में कोरोना संक्रमण के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी स्तर काफी तेज़ी से कम हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार, कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडीज़ की यह कमी कोरोना वायरस के पिछले वर्जन SARS की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से हो रही है।
ख़ैर, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और सर्दियों में फ्लू के मामले भी तेज़ी से बढ़ने की आशंका है, तो समय की ज़रूरत है कि आप ख़ुद का पूरा ध्यान रखें। वहीं, घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। इतना ही नहीं, डॉक्टर की सलाह से योग, प्रणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, विटामिन-डी की शरीर में आपूर्ति के लिए कम से कम 20 मिनिट तक सूर्य की रोशनी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहें।