WHO की 'यह' चेतावनी है काफी 'ख़तरनाक'!
WHO का सर्वे: कोरोना संकट के कारण 90 प्रतिशत देशों का हेल्थ सिस्टम बुरी तरह प्रभावित
SEP 01 (WTN) - चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इस समय मानव प्रजाति के अस्तित्व के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती है। यदि चीन की वामपंथी सरकार, कोरोना वायरस के मामले में ग़लती और लापरवाही नहीं बरतती और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया नहीं अपनाती, तो कोरोना वायरस पूरी दुनिया में नहीं फैलता। ख़ैर, कोरोना वायरस की भयावहता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इस इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक क़रीब 8,54,773 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोरोना वायरस से अभी तक क़रीब 2,56,38,129 लोग संक्रमित हो चुके हैं।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के इस कठिन दौर में लगभग हर देश के हेल्थ सिस्टम को सबसे ज़्यादा काम और मेहनत करना पड़ी है। लेकिन, इस महामारी के ख़िलाफ़ लम्बे समय से संघर्ष कर रहे कई देशों के हेल्थ सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। जी हां, WHO (World Health Organization) यानि विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सर्वे के अनुसार, दुनिया के 90% से ज़्यादा देशों का हेल्थ सिस्टम कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मार्च से जून के बीच मिले आंकड़ों से पता चलता है कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण कई देशों की हेल्थ सिस्टम व्यवस्था चरमरा रही है। वहीं, WHO ने आशंका ज़ाहिर की है कि यदि कुछ समय और ऐसा ही चलता रहा, तो कई देशों के हेल्थ सिस्टम ज़्यादा दिनों तक नहीं टिक पाएंगे।
इधर, WHO के अनुसार, कोरोना संकट के कारण मरीज़ों को कई रूटीन अपॉइंटमेंट और स्क्रीनिंग कैंसल करानी पड़ रही है। वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के कारण कैंसर के इलाज जैसे क्रिटिकल केयर पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। वहीं, आधे से ज़्यादा देशों में गर्भनिरोध और फैमिली प्लेनिंग के 68% मामले, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के इलाज से जुड़े 61% मामले और कैंसर के इलाज से जुड़े 55% मामले प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं, क़रीब 50 देशों में जीवन रक्षक आपातकालीन सेवाएं तक कम या बुरी तरह से प्रभावित हुईं हैं।
ख़ैर, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, तो ऐसे में WHO ने चेताया है कि जो देश भी बिना तैयारी के लॉकडाउन हटा रहे हैं वे एक तरह से तबाही को आमंत्रित कर रहे हैं। वहीं, WHO का मानना है कि कोरोना संकट के कारण मध्यम और कम आय वाले देशों को सबसे ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा है और आगे तब तक करना पड़ेगा जब तक कि कोरोना संकट कम नहीं हो जाता या पूरी तरह से ख़त्म नहीं हो जाता है।
इधर, WHO ने चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन को मंज़ूरी देने की प्रक्रिया को 'गंभीरता' से लिए जाने की ज़रूरत है। हालांकि, WHO की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि वैसे तो सभी देश ट्रायल पूरा किए बिना ही दवाओं और वैक्सीन को मंज़ूरी देने का अधिकार रखते हैं, लेकिन फिर भी इस काम को करने से पहले काफी तैयारियों की ज़रुरत है। वहीं, WHO ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश बिना क्लीनिकल ट्रायल पूरे किये वैक्सीन का इस्तेमाल करने जा रहे हैं उन्हें इसके गम्भीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।
ख़ैर, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अभी तक इसकी कोई भी वैक्सीन भारत में उपलब्ध नहीं है, तो समय की ज़रूरत है कि आप ख़ुद का पूरा ध्यान रखें। वहीं, घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। इतना ही नहीं, डॉक्टर की सलाह से योग, प्रणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, विटामिन-डी की शरीर में आपूर्ति के लिए कम से कम 20 मिनिट तक सूर्य की रोशनी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहें।