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ट्रांसजेंडरों को सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में शामिल करने की मांग पर जारी है 'बहस'

Saturday - July 4, 2020 4:56 pm , Category : WTN HINDI
कई देशों की सेना में शामिल हैं ट्रांसजेंडर
कई देशों की सेना में शामिल हैं ट्रांसजेंडर

क्या ट्रांसजेंडर सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के ज़रिए कर पाएंगे देश की रक्षा और सेवा?

JULY 04 (WTN) - महाभारत के युद्ध के एक योद्धा शिखण्डी बारे में तो जानते ही होंगे। शिखंडी के कारण ही महाभारत में भीष्म वध सम्भव हो सका था। दरअसल, शिखण्डी थर्ड जेंडर थे, और महाभारतकालीन युद्ध के नियमों के अनुसार, यदि थर्ड जेंडर युद्ध के समय सामने हो, तो हथियार उठाना वर्जित था। महाभारत काल के बाद आपने कई बार थर्ड जेंडर के युद्ध में शामिल होने के किस्से सुने होंगे।

बात यदि आधुनिक समय की करें, तो कई देशों की सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति होने लगी है। जहां तक भारत की बात है, तो अब भारत में भी सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति की मांग उठने लगी है। इसी कड़ी में गृह मंत्रालय ने असिस्टेंट कमांडेंट की परीक्षा में ट्रांसजेंडरों को भी थर्ड जेंडर की तरह शामिल करने की बात की है, और इस बारे में सुरक्षा बलों से राय मांगी गई है।

दरअसल, सेना, पैरामिलिट्री फोर्स या पुलिस में ट्रांसजेंडरों की भर्ती आसान नहीं रही। भारत समेत कई देशों में इस बात पर विवाद और बहस जारी है कि ट्रांसजेंडरों को सेना, पैरामिलिट्री फोर्स या पुलिस में भर्ती का अधिकार मिलना चाहिए कि नहीं?

आधुनिक समय में नीदरलैंड्स पहला देश बना था, जिसने अपने यहां थर्ड जेंडर को मिलिट्री में जगह दी। नीदरलैंड्स में साल 1974 से ही थर्ड जेंडर को मिलिट्री में भर्ती किये जाने का नियम है। वैसे जानकारी के मुताबिक, साल 2019 के अप्रैल तक, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इज़राइल और स्वीडन जैसे 19 देश ऐसे थे जहां पर ट्रांसजेंडरों की सेना में भर्ती होने लगी थी।

लेकिन इन देशों में सेना में ट्रांसजेंडरों की भर्ती सीमित तरीके से सिर्फ कुछ ही विभागों के लिए की जा रही है। बात करें अमेरिका की, तो साल 2016 में ओबामा सरकार ने थर्ड जेंडर लोगों को मिलिट्री में भर्ती किए जाने की नीति बनाई थी। लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनते ही उन्होंने इस नीति पर रोक लगा दी। हालांकि, काफी पाबंदियों के साथ भी अमेरिका में अभी भी कुल 8,980 ट्रांसजेंडर अमेरिकी सेना में हैं।

सेना में थर्ड जेंडर या ट्रांसजेंडर की नियुक्ति की जाए कि नहीं ? इस विषय पर काफी विवाद रहा है। विरोध करने वालों का तर्क है कि ट्रांसजेंडर होना एक तरह की मानसिक बीमारी है, और इसी कारण से ट्रांसजेंडर सेना में नियुक्ति के लिए फिट नहीं हैं। दरअसल, देखा गया है कि ट्रांसजेंडरों में डिप्रेशन और खुदकुशी के मामले ज़्यादा देखने को मिलते हैं। वहीं, जेंडर चेंज कराने के लिए काफी लोग एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरॉन थैरेपी भी लेते हैं, और इसी कारण से इनके शरीर में कई समस्याएं और बीमारियां पैदा होती हैं।

जहां तक भारत की बात है, तो भारत में साल 2011 की जनगणना के अनुसार क़रीब 4,90,000 ट्रांसजेंडर हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संसद ने साल 2019 में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रॉटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल पास किया था, इसके तहत ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए सारी कोशिशें की जा रही हैं। यही कारण है कि पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडरों की भर्ती की मांग उठने लगी है।

लेकिन दुनिया के अन्य देशों की परिस्थिति की तुलना भारत की परिस्थिति से नहीं की जा सकती है। जिन देशों में ट्रांसजेंडर को सेना में भर्ती होने की इजाज़त मिली है, उनमें इज़रायल को छोड़कर किसी भी देश की सीमा पर परिस्थिति भारत की तरह संवेदनशील नहीं है। आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान और विस्तारवादी चीन जैसे देशों के कारण भारत में सेना और पैरामिलिट्री फोर्स की नियुक्तियां काफी महत्वपूर्ण और संवेदनशील हैं। वहीं, देश के अंदर नक्सलियों की समस्या के कारण भी पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडरों की नियुक्ति के पहले काफी विचार करने की ज़रूरत है।